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केंद्रीय बजट जनकल्याण नहीं, कॉरपोरेट हितों का घोषणापत्र : कुशवाहा राकेश महतो

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केंद्रीय बजट जनकल्याण नहीं, कॉरपोरेट हितों का घोषणापत्र : कुशवाहा राकेश महतो

रांची

आज पेश किए गए केंद्रीय बजट को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष ओबीसी विभाग कुशवाहा राकेश महतो ने बयान जारी कर कहा कि यह बजट देश के गरीबों, किसानों, मजदूरों, छात्रों, युवाओं और मध्यम वर्ग के साथ खुला विश्वासघात है। उन्होंने इसे जनहित का बजट मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह पूरी तरह कॉरपोरेट परस्त सोच से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता आम जनता नहीं, बल्कि चुनिंदा पूंजीपतियों के मुनाफे हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई से त्रस्त आम जनता को इस बजट में एक पैसे की भी राहत नहीं दी गई है, जबकि देश में बेरोजगारी चरम पर है और युवाओं का भविष्य अंधकार की ओर धकेला जा रहा है।

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कुशवाहा राकेश महतो ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी अधिकारों पर खर्च घटाकर सरकार देश को अशिक्षा और सामाजिक असमानता की ओर ले जाना चाहती है। वहीं किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी गई और न ही किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए कोई ठोस रोडमैप सामने रखा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के लिए बजट में केवल खोखले वादे और जुमले ही हैं, जमीन पर असर डालने वाली कोई ठोस योजना नहीं दिखती। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस बजट को विकास का नहीं, विनाश का दस्तावेज़ करार देते हुए कहा कि यह संविधान की सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है। उन्होंने बजट को सिरे से खारिज करते हुए देशभर में इसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। अपने बयान के अंत में उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन जनता का आक्रोश वह ताकत है जो इतिहास बदलने की क्षमता रखता है।

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