निजी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को भी मिले सरकारी योजनाओं का लाभ : आलोक कुमार दुबे
आगामी बजट में शिक्षा समानता की मांग, वित्त मंत्री को सौंपा ज्ञापन
रांची
आगामी राज्य बजट में निजी विद्यालयों में अध्ययनरत गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ दिए जाने की मांग उठी है। इस संबंध में पब्लिक स्कूल्स एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे एवं उपाध्यक्ष लाल किशोर नाथ शाहदेव ने झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। पासवा प्रतिनिधियों ने बताया कि झारखंड में लगभग 47,000 निजी विद्यालय संचालित हैं, जो ग्रामीण, कस्बाई और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शिक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे गरीब, आदिवासी, दलित एवं मेहनतकश वर्ग के परिवारों से आते हैं।
इनमें रिक्शा चालक, ऑटो चालक, प्लंबर, कारपेंटर, सब्जी विक्रेता जैसे श्रमिक वर्ग के बच्चों की संख्या अधिक है। आलोक कुमार दूबे ने कहा कि वर्तमान में सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाएँ जैसे स्कूल ड्रेस, पाठ्यपुस्तक, साइकिल, छात्रवृत्ति आदि—केवल सरकारी विद्यालयों तक सीमित हैं। जबकि निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब बच्चे भी समान नागरिक हैं और उन्हें भी समान अवसर मिलना चाहिए। केवल विद्यालय के प्रकार के आधार पर बच्चों को योजनाओं से वंचित रखना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। पासवा ने यह भी उल्लेख किया कि सीमित संसाधनों के बावजूद निजी विद्यालयों के शिक्षक बच्चों को अनुशासन, संस्कार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं। यदि सरकार निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को योजनाओं से जोड़ेगी तो इससे ड्रॉपआउट दर में कमी, शिक्षा में समानता और सामाजिक संतुलन को मजबूती मिलेगी। संस्था ने आगामी बजट में इस विषय पर ठोस प्रावधान करने की मांग करते हुए उम्मीद जताई कि सरकार इस जनहित के मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लेकर शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी और संवेदनशील बनाएगी।

