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महाशिवरात्रि 15 फरवरी को, मनाई जाएगी शिवभक्ति की महापर्व, जानें शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

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महाशिवरात्रि 15 फरवरी को, मनाई जाएगी शिवभक्ति की महापर्व, जानें शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

अमूल्य चंद्र पांडेय
विष्णुगढ़

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक पावन और महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान शिव की आराधना को समर्पित है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी रविवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। खास बात यह है कि इसी दिन प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला 2026 का समापन भी होगा, जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है। महाशिवरात्रि का मतलब भगवान शिव की महान रात्रि। इस दिन लाखों श्रद्धालु उपवास रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र आदि अर्पित कर भोलेनाथ का पूजन करते हैं। पं कुंतलेश पाण्डेय बतातें है कि पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026 की शाम 05:07 से प्रारंभ होकर 16 फरवरी शाम 05:36 तक रहेगी। चूंकि महाशिवरात्रि की पूजा और रात्रि जागरण रात्रिकाल में किए जाते हैं, इसलिए महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 की रात को ही मनाई जाएगी। इसी दिन व्रत रखना और रात्रि पूजन करना शास्त्रसम्मत माना गया है।

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ज्योतिषीय गणना के अनुसार महाशिवरात्रि पर निशिता काल पूजन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। निशिता काल: रात 12:09 बजे से 12:59 बजे तक (15 फरवरी)। पूरी रात चार प्रहरों में पूजा किया जाता है। पहला प्रहर: शाम 6:19 से 9:26, दूसरा प्रहर: रात 9:26 से 12:34, तीसरा प्रहर: 12:34 से 3:41, चौथा प्रहर: 3:41 से सुबह 6:48 है। पं कुंतलेश पाण्डेय अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। शिव को पुरुष चेतना और पार्वती को प्रकृति माना जाता है। दोनों के मिलन से सृष्टि का संचालन होता है। एक अन्य कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने स्वयं पीकर संसार की रक्षा की थी। इसी कारण शिव को नीलकंठ कहा जाता है।इस दिन शिवभक्त निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है और विवाहितों का दांपत्य जीवन सुखमय रहता है। शिवलिंग का अभिषेक दूध, जल, शहद और घी से किया जाता है । वहीं शिवलिंग पूजा के दौरान केतकी का फूल, टूटे हुए चावल, नारियल का पानी, सिंदूर और कुमकुम वहीं शंख से जल अर्पित करना क्योंकि शिव पूजा में शंख का प्रयोग वर्जित है। इस दिन“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना चाहिए । साथ में रात्रि जागरण, भजन-कीर्तन और शिव पुराण का पाठदान-पुण्य और सेवा कार्य का विशेष महत्व है ।

शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में अंतर

शिवरात्रि हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है। महाशिवरात्रि वर्ष में एक बार फाल्गुन माह में मनाई जाती है और इसका धार्मिक महत्व अत्यधिक होता है। महाशिवरात्रि 2026 आत्मशुद्धि, भक्ति और साधना का विशेष अवसर है। यह पर्व श्रद्धालुओं को भगवान शिव के और करीब लाने का संदेश देता है। उपवास, पूजा और सेवा के माध्यम से भक्त इस दिन शिवकृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं।

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