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मां-बाप अपने संतान को भक्ति का मार्ग बाल्यकाल से ही चलना सिखाएं : गोविंद दास शास्त्री

Suresh Mahapatra
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मां-बाप अपने संतान को भक्ति का मार्ग बाल्यकाल से ही चलना सिखाएं : गोविंद दास शास्त्री

 

 

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पोटका से सुरेश कुमार महापात्र की रिपोर्ट 

 

 

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कोवाली अंतर्गत मुहूलड़िहा गांव में श्री श्री राधा गोविंद भागवत सेवा संघ दक्षिण पोटका के द्वारा सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा भक्ति सह ज्ञान यज्ञ कि तृतीय दिवस सोमवार के भागवत प्रवचन की शुभारंभ भगवान की आरती, मंगलाचरण एवं संकीर्तन के साथ शाम 4 बजे प्रारंभ हुई। जिसमें कथावाचक गोविंद दास शास्त्री जी महाराज ने कथा में उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनते हुए समझाया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाएं रखने के लिए धैर्य और संयम की नितांत आवश्यकता रहती है । भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्री हरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भक्ति के लिए कोई उम्र नहीं होता है हर मां-बाप अपने संतान को बचपन में ही भक्ति मार्ग में चलने की प्रेरणा देनी चाहिए ,क्योंकि बचपन कच्ची मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है ।कथा के दौरान उन्होंने बताया की पाप के बाद कोई व्यक्ति नर्कगामी हो इसके लिए श्रीमद् भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया है । कथा में हिरण्य काश्यप का अहंकार ,प्रहलाद की भक्ति, नरसिंह अवतार, हिरण्य काश्यप का वध, प्रहलाद की रक्षा को दर्शाते हुए भगवान विष्णु की अनंत शक्ति और भक्तों की रक्षा के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाया गया। कथा के तदनुररूप आयोजक मंडली द्वारा झांकी का प्रदर्शन कर भक्त मंडली को कथा के सार तत्वों को प्रकाश किया गया।भागवत कथा में झांकी आकर्षण का केंद्र रहा।

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