भायेर कपाले दिलाम फोटा, यम दुआरे पड़लो कांटा के मंगल ध्वनि के साथ मनाया गया भैया दूज
बहनों ने की भाईयों की लंबी उम्र व समृद्धि की कामना
झारखंड न्यूज 24
बिंदापाथर
प्रियजीत पाण्डेय
बिंदापाथर थाना मुख्यालय के अलावा मंझलाडीह, मोहनाबांक, डुमरीया, हरिराखा, खैरा, बान्दो, गेड़िया, श्रीपुर, फुटवेड़िया, चापुड़िया, बस्ती पालाजोरी सहित संपूर्ण क्षेत्र में गुरुवार को धुमधाम के साथ भैयादूज पर्व मनाया गया। भाई की लंबी उम्र की कामना के साथ अटूट स्नेह और प्रेम का प्रतीक भैया दूज पर्व के दौरान गांव-गांव में सुबह से दिनभर उत्साह का माहौल बना रहा। बंगाल से सटा हुआ इस इलाके में भाईफोंटा के नाम से यह काफी लोकप्रिय पर्व माना जाता है। दूर-दूर क्षेत्र में रहने वाले भाई भी इस पर्व में बहन के पास अवश्य पहुंच जाता है। इस मौके पर बहनों ने भाई के ललाट में चंदन टीका लगाकर उसके लंबी उम्र की कामना की। भायेर कपाले दिलाम फोटा यम दुआरे पड़लो कांटा, अर्थात भाई के माथे पर लगाई गई टीका से यमराज के द्वार पर कांटा बिछ गया। इसी मंगल ध्वनि के साथ बहनों ने अपने भाईयों की ललाट में चंदन टीका लगाकर कुशलता के साथ साथ दीर्घायु की कामना किया। इस पर्व के पावन अवसर पर घर-घर में नन्हें मुन्ने, युवा और बड़ों ने खुशी खुशी यह पर्व मनाया। प्राचीन परंपरा के अनुसार भाई ने बहन को आशीर्वाद के साथ उपहार भी दिया।
शास्त्रों के अनुसार भाई-बहन के स्नेह और प्रेम का प्रतीक है भैया दूज। दीपावली के अंतिम दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस दिन यमुना ने अपने भाई यमराज को घर पर आमंत्रित किया था और स्वागत सत्कार के साथ टीका लगाया था तभी से यह त्योहार मनाया जाता है। सूर्य की संज्ञा से दो संतानें थीं एक पुत्र यमराज और दूसरी पुत्री यमुना। संज्ञा सूर्य का तेज सहन न कर पाने के कारण अपनी छायामूर्ति का निर्माण कर उसे ही अपने पुत्र-पुत्री को सौंपकर वहां से चली गई। छाया को यम और यमुना से किसी प्रकार का लगाव न था, लेकिन यम और यमुना में बहुत प्रेम था बहन का प्यार देखकर यमराज इतने खुश हुए कि उन्होंने यमुना को खूब सारे भेंट दिए। यम जब बहन से मिलने के बाद विदा लेने लगे तो बहन यमुना से कोई भी अपनी इच्छा का वरदान मांगने के लिए कहा। यमुना ने उनके इस आग्रह को सुन कहा कि अगर आप मुझे वर देना ही चाहते हैं तो यही वर दीजिए कि आज के दिन हर साल आप मेरे यहां आएं और मेरा आतिथ्य स्वीकार करेंगे। कहा जाता है इसी के बाद हर साल भैयादूज का त्यौहार मनाया जाता है।

