देवोत्थान एकादशी व्रत को ले भक्त वैष्णव में उत्साह
भगवान के मंदिरों में प्रवाहित हो रही है भक्ति की अविरल
झारखंड न्यूज 24
नाला
बासुदेव
धार्मिक दृष्टिकोण से लोक समाज में कार्तिक माह का एक अलग ही महत्व है। इस माह को धर्म का महीना के नाम से मान्यता प्राप्त है। इस पवित्र महीना में देवी देवताओं के पूजा, जाप,धर्मग्रंथों का पाठ, सूर्य भगवान श्रीकृष्ण की उपासना से लेकर भजन कीर्तन आदि विभिन्न धार्मिक कर्मकांड का आयोजन समर्पण भाव से किया जाता है। वर्तमान समय में नाला प्रखंड क्षेत्र के देवलेश्वर धाम स्थित राधा गोविंद मंदिर के अलावा गोपाल मंदिर गोपालपुर, बासुदेव मंदिर सारेशकुंडा, राधा दामोदर मंदिर कुलडंगाल में देवोत्थान एकादशी व्रत उत्सव को लेकर भक्ति की धारा निरंतर प्रवाहित होने लगी है। कल यानी शुक्रवार और शनिवार को भगवान के दरबार में भक्त वैष्णवों द्वारा पूजार्चना, भोग आरती से लेकर भजन कीर्तन अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए भक्त वैष्णवों के दिल दिमाग में अपार श्रद्धा भक्ति का संचार हो रहा है। उक्त सभी स्थानों में भगवान के दरबार में एक माह से जारी नित्य पूजा, भजन आरती के साथ साथ सालाना राधा कृष्ण का जन्मोत्सव, देवोत्थान पर्व भक्त वैष्णवों के द्वारा बड़ा ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।
मंदिर के आचार्य हलधर झा के अनुसार वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार चालू मौसम में कार्तिक माह के मौके पर भक्त वैष्णवों की भीड़ उमड़ती है। कहते हैं कि प्रातः करीब साढ़े तीन बजे से ही स्नानोपरांत ठाकुर जी को जगाने, पवित्र स्नान, वस्त्र परिधान,पुष्पाभिषेक, पूजा,भोग आरती, मंगल कीर्तन, प्रसाद वितरण आदि अनुष्ठान भक्तिमय वातावरण में संपन्न होता है। इतना ही नहीं रोजाना शाम को भी भक्त वैष्णव मंडली के द्वारा पूर्ण समर्पित होकर पूजा, आरती और भजन कीर्तन प्रस्तुत किया जाता है। अनुष्ठान में शामिल नहीं होने वाले श्रद्धालुओं के कानों तक आरती कीर्तन की मधुर ध्वनि पहुंचाने के लाउडस्पीकर की व्यवस्था किया गया है।
ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि एक माह तक नियमसेवा में शामिल होने वाले भक्त वैष्णव को हर क्षण सावधानी और चुनौती भरा काम से गुजरना पड़ता है। निर्धारित नियम के अनुसार भक्त वैष्णव को प्रातः एवं सायं स्नान, सात्विक भोजन, साधारण शयन, हजामत तथा प्रसाधन सामग्री से परहेज करते हुए भगवान की उपासना में लीन हो जाते हैं। कल देवोत्थान एकादशी व्रत के लिए भगवान के दरबार में भक्तों द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां किया गया है। एक महीना तक जारी नियमसेवा व्रत का भी समापन होगा। उक्त तिथि को भजन कीर्तन,आरती अनुष्ठान को लेकर भक्त वैष्णवों में अपार खुशी और उत्साह व्याप्त है।

