आईसेक्ट विश्वविद्यालय में विश्व मृदा दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन, बताई गई मृदा संरक्षण की अहमियत
मिट्टी सिर्फ ज़मीन का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारी जिंदगी की बुनियाद : डॉ मुनीष गोविंद
हमारे अस्तित्व की नींव है मृदा : प्रो पीके नायक
हजारीबाग
आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग के कृषि विभाग की ओर से शुक्रवार को विश्व मृदा दिवस बड़े उत्साह और जज़्बे के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में मृदा संरक्षण, सतत कृषि पद्धति और कृषि वैज्ञानिकों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो पीके नायक ने कहा कि मिट्टी हमारे अस्तित्व की नींव है। अगर मिट्टी स्वस्थ है तो कृषि, पर्यावरण और मानव जीवन, सभी सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि आईसेक्ट विश्वविद्यालय वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किसानों और विद्यार्थियों को नई तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत है। कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने कहा कि विश्व मृदा दिवस हमें यह एहसास दिलाता है कि मिट्टी सिर्फ ज़मीन का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारी ज़िंदगी की बुनियाद है। इसकी सेहत में ही हमारी खेती, हमारा पर्यावरण और हमारा कल छिपा है। हमारा विश्वविद्यालय शोध, नवाचार और व्यवहारिक शिक्षा का संगम है।
हम आधुनिक तकनीक, मृदा परीक्षण सुविधाओं और फ़ील्ड-आधारित ट्रेनिंग के ज़रिए विद्यार्थियों को ज़मीन से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं समकुलपति डॉ गौरव शुक्ला ने मृदा की गुणवत्ता में गिरावट पर चिंता जताते हुए कहा कि अत्यधिक रासायनिक उपयोग, कटाव और जलवायु परिवर्तन मिट्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हमें जैविक खेती, फसल चक्रीकरण और आधुनिक मृदा परीक्षण तकनीकों को बढ़ावा देना होगा, तभी खेती का भविष्य सुरक्षित रहेगा। कृषि विभाग के डीन डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि विभाग, विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक शिक्षा, मृदा परीक्षण, नमी संरक्षण और उर्वरक प्रबंधन के उन्नत तरीकों से प्रशिक्षित कर रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि तभी मजबूत होगी जब किसान मिट्टी को समझेंगे। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थी भविष्य के ऐसे कृषि विशेषज्ञ बनें, जो धरती को बचाने में अहम भूमिका निभा सकें। इस अवसर पर कृषि विभाग में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और मृदा संरक्षण के महत्व पर प्रस्तुति दी। संचालन सह-प्राध्यापिका फरहीन सिद्दीकी ने किया, जिनके संचालन ने कार्यक्रम में एक रौनक पैदा कर दी। कार्यक्रम के सफल संचालन में डीन डॉ अरविंद कुमार, एचओडी डॉ सत्यप्रकाश विश्वकर्मा, प्रभात किरण, डॉ सुजीत कुमार पटेल सहित अन्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

