हर चीज का रेट फिक्स है, हुजूर यह दुकान नहीं सरकारी विद्यालय है
झारखंड न्यूज़ 24
जामताड़ा
मनीष बरणवाल
हर चीज का रेट फिक्स है, हुजूर यह दुकान नहीं सरकारी विद्यालय है। जामताड़ा जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर फतेहपुर जैसे ग्रामीण व पिछड़े क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा प्रदान कर समाज के मुख्य धारा से जोड़ने के उद्देश्य से विद्यालय की स्थापना की गई थी लेकिन वर्तमान समय में विद्यालय के प्रधानाध्यापक, शिक्षक और एक प्राइवेट कर्मचारी के मिली भगत से यहां पढ़ाई तो नग्णय लेकिन अवैध उगाई चरम पर है। यहां छात्रों को मिलने वाली हर मुफ्त सेवा के लिए रेट फिक्स है। नहीं देने वाले छात्रों को प्रताड़ित करने से भी यहां के शिक्षक गुरेज नहीं करते हैं। अवैध उगाही का अड्डा बन चुका आर के प्लस टू स्कूल फतेहपुर में व्याप्त अराजकता से छात्र,अभिभावक, विद्यालय प्रबंधन समिति सब त्रस्त है।
उनका कहना है शिक्षा विभाग के पदाधिकारी को इस बाबत जानकारी देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती है। विद्यालय प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष और छात्रों का आरोप है विद्यालय के प्राइवेट स्टाफ आईसीटी इंस्ट्रक्टर विद्यासागर मंडल,पीटी टीचर विक्रम बेरा,ज्योग्राफी टीचर धनंजय महतो की टिकरी के द्वारा छात्रों से विभिन्न मद में अवैध राशि की उगाही की जाती है। उनके द्वारा बताया गया कि प्राइवेट कर्मचारी आईसीटी इंस्ट्रक्टर विद्यासागर मंडल विद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के सूत्रधार हैं। उनका कार्य केवल कंप्यूटर में बच्चों की डाटा एंट्री का कार्य करना है लेकिन उनके द्वारा ई कल्याण के तहत मिलने वाली छात्रवृत्ति पर ₹50 कक्षा 9 11 के छात्राओं से रजिस्ट्रेशन का नाम पर दे राशि के अलावा ₹50, कक्षा 10 एवं 12 के फॉर्म फिल्लप के एवज में अलग से राशि व जैक का फीस सहित विद्यालय में अवैध रूप से विभिन्न फॉर्म की बिक्री की जाती है।
छात्र इन शिक्षकों से इतने भयभीत है वे अपना नाम उजागर करने से परहेज़ कर रहे थे। हालांकि छात्रों ने आरोप लगाया कि पीटी टीचर विक्रम बेरा बच्चे अगर ड्रेस में नहीं आते हैं तो 10 से ₹20 छात्रों से वसूलते हैं। जिसकी उन्हें कोई रसीद नहीं दिया जाता है। छात्रों ने बताया कि ज्योग्राफी टीचर धनंजय महतो के द्वारा छात्र छात्राओं से प्रैक्टिकल के परीक्षा में नंबर देने के नाम पर ₹500 तक वसूला गया है। इस बाबत विद्यालय के प्रधानाध्यापक से पूछा गया तो वे पहले तो इस बाबत अनभिज्ञ नजर आए। मौके पर छात्राओं के द्वारा इस बाबत कहा गया तो उन्होंने विद्यालय में आईसीटी इंस्ट्रक्टर के द्वारा अवैध उगाही की बात कबूल किया और कहा कि आईसीटी इंस्ट्रक्टर एवं अन्य शिक्षकों को इस बाबत सख्त मनाही किया गया है और उनके द्वारा वसूली गई अवैध राशि कुछ छात्रों को वापस भी कराया गया है। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो विद्यालय में योगदान दे रहे शिक्षक अनुपस्थित रहने के बावजूद भी अपनी उपस्थिति विद्यालय के प्रधानाध्यापक के मिलीभगत से बनाते दी है। कहीं न कहीं विद्यालय में व्याप्त अराजकता में विद्यालय के प्रधानाध्यापक की सहभागिता से इन्कार नहीं किया जा सकता है। बताते चलें कि विद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं आईसीटी इंस्ट्रक्टर के द्वारा अपने कार्य के इतर अवैध राशि की वसूली करने की जानकारी मिलने पर जामताड़ा उपायुक्त ने उसे हटाने का निर्देश दिया है।
हालांकि इस बाबत आईसीटी इंस्ट्रक्टर विद्यासागर ने छात्रों के आरोप को अपने विरुद्ध साजिश बताया और खुद को निर्दोष भी..

