रेनबो स्कूल बरही में राष्ट्रगान जन गण मन के ऐतिहासिक गायन की स्मृति का पुनर्जीवन
राष्ट्रगान केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और एकता का प्रतीक है : सिकन्दर प्रसाद कुशवाहा
बरही
शिवपुर गडलाही में संचालित रेनबो स्कूल बरही में देशभक्ति और ऐतिहासिक चेतना से ओत-प्रोत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें भारत के राष्ट्रगान जन गण मन के प्रथम गायन के ऐतिहासिक क्षण को जीवंत रूप में पुनर्जीवित किया गया। विद्यालय परिसर देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया और विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों ने भी इस गौरवपूर्ण पल का अनुभव किया। कार्यक्रम में बताया गया कि 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 26वें अधिवेशन, कोलकाता में पहली बार राष्ट्रगान जन गण मन गाया गया था। उस ऐतिहासिक अधिवेशन की अध्यक्षता पंडित विष्णु नारायण धर ने की थी।
राष्ट्रगान का प्रथम गायन सरला देवी चौधरानी, जो महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर की भतीजी थीं, ने अपनी सहेलियों के साथ किया था। यह क्षण भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज है। रेनबो स्कूल बरही द्वारा इसी ऐतिहासिक क्षण को विद्यार्थियों के सामने सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के दौरान मंच सज्जा, वेशभूषा और प्रस्तुति के माध्यम से 1911 के उस कोलकाता अधिवेशन की झलक दिखाई गई, जिससे बच्चों में इतिहास के प्रति रुचि और राष्ट्रभक्ति की भावना और अधिक प्रबल हुई। विद्यालय के निदेशक सिकन्दर प्रसाद कुशवाहा ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रगान केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और एकता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि बच्चों को केवल किताबों तक सीमित न रखते हुए उन्हें अपने देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़ें। जब बच्चे ऐसे ऐतिहासिक पलों को महसूस करते हैं, तो उनके भीतर देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना स्वतः विकसित होती है। उन्होंने आगे कहा कि रेनबो स्कूल शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, देशप्रेम और सामाजिक मूल्यों के विकास को भी समान महत्व देता है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं और उन्हें एक जागरूक नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने एक स्वर में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का गायन किया। पूरा परिसर देशभक्ति के जयघोष और राष्ट्रगान की गूंज से भावविभोर हो उठा। अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने भी विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए इसे एक प्रेरणादायक प्रयास बताया। रेनबो स्कूल बरही का यह आयोजन न केवल एक ऐतिहासिक स्मृति का पुनर्जीवन था, बल्कि आने वाली पीढ़ी के मन में राष्ट्र के प्रति गर्व और सम्मान जगाने की एक सार्थक पहल भी साबित हुआ।

