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देश की आजादी के लिए कम्युनिस्ट पार्टी के हजारों लोगों ने शहादत दी : भुवनेश्वर मेहता

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देश की आजादी के लिए कम्युनिस्ट पार्टी के हजारों लोगों ने शहादत दी : भुवनेश्वर मेहता

हजारीबाग में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का 100वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया

हजारीबाग |

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) का 100वां स्थापना दिवस हजारीबाग स्थित पार्टी कार्यालय मंजूर भवन में धूमधाम एवं उत्साहपूर्ण माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में पार्टी नेता, कार्यकर्ता एवं समर्थक उपस्थित रहे।

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समारोह की अध्यक्षता तीन सदस्यीय अध्यक्ष मंडल- कामरेड कृष्ण कुमार, कामरेड महादेव मांझी एवं कामरेड रामेश्वर सावने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर अनवर हुसैन ने किया। स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद कामरेड भुवनेश्वर प्रसाद मेहता शामिल हुए।

मुख्य अतिथि कामरेड भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का गठन 26 दिसंबर 1925 को कानपुर में हुआ था, ठीक उसी दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गठन नागपुर में हुआ। उन्होंने कहा कि पार्टी के गठन के साथ ही उसके नेता और कार्यकर्ता ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आजादी की लड़ाई में कूद पड़े और पूर्ण स्वतंत्रता की मांग के साथ संघर्ष को आगे बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1929 में पार्टी के वरिष्ठ नेता कामरेड अमृत पाद डांगे जेल में बंद थे, जहां महात्मा गांधी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल को उनसे मिलने भेजा था, ताकि अंग्रेजों के खिलाफ संयुक्त आंदोलन की रणनीति बनाई जा सके। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की शर्तों पर, जो पूर्ण आजादी की मांग करती थीं, देशव्यापी संघर्ष की शुरुआत हुई। उस दौर में देश में मुख्य रूप से दो ही राजनीतिक दल थे, कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी।

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कामरेड मेहता ने कहा कि आजादी की लड़ाई में शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, अशफाकउल्ला खान, राम प्रसाद बिस्मिल और चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में हजारों नौजवानों ने बलिदान दिया। आजादी के बाद भी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने जमींदारी, महाजनी प्रथा और पूंजीपतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। हैदराबाद के निजाम के खिलाफ संघर्ष में करीब 40 हजार कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं ने भाग लिया, जिसका नेतृत्व कामरेड सी. राजेश्वर राव कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि देशभर में जमींदारी और पूंजीवादी शोषण के खिलाफ संघर्ष में हजारों लोगों ने शहादत दी। हजारीबाग जिले से भी कामरेड मंजरुल हसन खान, मायाराम महतो, महेश महतो, कुंवर महतो, मंगल करमाली, रामलाल महतो, कैलाश महतो, विश्वनाथ महतो सहित दर्जनों कम्युनिस्ट नेताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी। इस आंदोलन की शुरुआत कामरेड मंजरुल हसन खान ने की थी, जिसमें स्वयं कामरेड भुवनेश्वर प्रसाद मेहता बड़कागांव, केरेडारी, सिमरिया और टंडवा क्षेत्रों में सक्रिय रूप से आंदोलनरत रहे और कई बार जानलेवा हमलों का भी सामना किया।

समारोह में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं कामरेड भुवनेश्वर प्रसाद मेहता, नंदकिशोर सिंह, रामेश्वर साव, देवलाल साव, बिंदेश्वरी साव, महादेव मांझी सहित अन्य नेताओं को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर आयोजित सेमिनार को सीपीएम के जिला सचिव गणेश कुमार सीटू, नेमन यादव, सीपीआई जिला सचिव कामरेड अनिरुद्ध कुमार, महेंद्र राम, मजीद अंसारी, सुदेशी पासवान, राम कुमार साव, रामकृष्ण सिंह, प्रवीन मेहता, चिंतामणि कुमार, एडवोकेट शंभू कुमार सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ऐतिहासिक भूमिका और वर्तमान दौर में उसके संघर्षों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

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