चतरा-
चतरा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मौत का कारोबार फल-फूल रहा है। हालात यह हैं कि यहां अवैध क्लिनिकों का संचालन कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है। शहर से लेकर गाँव तक जगह-जगह बगैर अनुमति के अस्पताल और क्लिनिक चल रहे हैं।
जिला प्रशासन की कार्रवाई से जब-तब इन नकली अस्पतालों में भगदड़ मच जाती है मालिक दुकान बंद कर फरार हो जाते हैं। लेकिन जैसे ही अभियान खत्म होता है, फिर से वही कारोबार धड़ल्ले से शुरू कर देते हैं।
22 निबंधित बनाम 150 अवैध
जिले में कुल निबंधित अस्पतालों की संख्या सिर्फ 22 है, लेकिन धरातल पर 150 से अधिक क्लिनिक खुलेआम संचालित हो रहे हैं।
नियम कहता है हर निबंधित अस्पताल में 24×7 एमबीबीएस डॉक्टर, सर्जन और मूर्छक चिकित्सक अनिवार्य हैं। मगर हकीकत में जिले भर के अधिकांश अस्पताल बिना किसी योग्य डॉक्टर के लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की खुली पोल
अवैध संचालन की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि नाम गिनाते-गिनाते थकान हो जाए। निबंधित अस्पतालों में सिर्फ गिने-चुने बड़े नाम शामिल हैं—जैसे सदर अस्पताल चतरा, एनटीपीसी टंडवा का संजीवनी अस्पताल, सीसीएल आम्रपाली टंडवा, जीवन धारा डायलिसिस सेंटर, आरबी हॉस्पिटल, मेहता हॉस्पिटल, अंकुश हॉस्पिटल, मां हरी सेवा सदन, पारस हॉस्पिटल बगरा, आपोलो हॉस्पिटल चतरा और कुछ चुनिंदा अन्य। बाकी सभी क्लिनिक कानून तोड़कर धंधा कर रहे हैं।
सिविल सर्जन की सख्ती
सिविल सर्जन डॉ. जगदीश प्रसाद ने खुलासा किया कि जिले के सभी निबंधित और गैर-निबंधित अस्पतालों की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। जो भी संस्थान नियमों के खिलाफ पाए जाएंगे, उन्हें तुरंत सील कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

