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हजारीबाग की युवा लेखिका 20 वर्षीय अंतरा, जिसने अपने भावनाओं को दिया उड़ान, शब्दों से रचा राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुकाम

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हजारीबाग की युवा लेखिका 20 वर्षीय अंतरा, जिसने अपने भावनाओं को दिया उड़ान, शब्दों से रचा राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुकाम

हजारीबाग

नवरात्रि का पावन पर्व जो मातृ शक्ति के सम्मान और सनातनी आस्था का प्रतीक है, अपने आखिरी तीन दिनों में ज्ञान और रचनात्मकता की देवी मां सरस्वती की आराधना का अवसर लाता है। ऐसे समय में उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के मुख्यालय हजारीबाग से एक ऐसी युवा साधिका का परिचय आवश्यक है, जिसने अपनी कलम और कला से न सिर्फ अपनी पहचान बनाई है, बल्कि वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है।
हम बात कर रहे हैं युवा लेखिका, चित्रकार और कहानीकार अंतरा की जिन्होंने महज़ 20 वर्ष की उम्र में साहित्य लेखन के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

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*सोशल मीडिया से दूर, साहित्य में मग्न एक युवा आवाज़*

एक ओर जहाँ देश की वर्तमान युवा पीढ़ी अपना बहुमूल्य समय सोशल मीडिया और पाश्चात्य संस्कृति की अंधी दौड़ में खपा रही है, वहीं हजारीबाग शहर के दीपूगढ़ा स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी की रहने वाली अंतरा ने एक अलग राह चुनी। उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ कठिन तपस्या, एकाग्रचित्ता और आत्मचिंतन के बल पर लेखन और चित्रकारिता को अपना माध्यम बनाया।
झारखंड सशस्त्र पुलिस 7 में कार्यरत रहे स्व. राजेश कुमार और गृहिणी अनामिका सिंह की सुपुत्री अंतरा ने माउंट कार्मेल स्कूल, हजारीबाग से 10वीं उत्तीर्ण की और कोटा में इंजीनियरिंग की तैयारी भी की। फिलहाल अंतरा ऑस्ट्रेलिया की कैंपस दुबई में वालोंगोंग़ यूनिवर्सिटी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डाटा साइंस में स्नातक कर रही हैं।
फ़िलहाल अपनी व्यस्तता के बावजूद उन्होंने अंग्रेजी भाषा में तीन बेहतरीन पुस्तकें लिखी हैं। जिसमें। हार्मोनिज ऑफ एटरनीटी, मोजैक ऑफ मिस्ट्रीज और डिकोड द गैप शामिल है।

*डायरी लेखन से अंतर्राष्ट्रीय सम्मान तक का तय किया सफ़र*

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अंतरा के इस साहित्यिक सफर की शुरुआत एक गहरे भावनात्मक मोड़ से हुई। वर्ष 2014 में एक सड़क दुर्घटना में पिता के आकस्मिक निधन के बाद वह बहुत खामोश रहने लगी थीं। तब उनके नाना अरिंजय कुमार सिंह उन्हें कहानियाँ सुनाकर मन बहलाया करते थे। इसी दौरान उनके भाई उत्कर्ष ने उन्हें डायरी लिखने की सलाह दी, जो जल्द ही एक हॉबी में बदल गई। उनकी लेखनी को निखारने में उनके दादाजी स्व. कपिल देव सिंह का अतुल्य योगदान रहा। अंतरा बताती हैं कि जब भी वह लेखन से पूर्व भावनाओं में गोता लगाती हैं, तो उनके दादाजी द्वारा बचपन में सुनाई गई लघु कहानियाँ स्मरण में आ जाती हैं, जो उन्हें परिवार का महत्व और जीवन में आगे बढ़ने की सीख देती हैं।

*उपलब्धियाँ जिन्होंने हजारीबाग को दिलाया गौरव*

अंतरा की लेखन कला को राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति उनकी दूसरी किताब हमोजैक ऑफ मिस्ट्रीज से मिली। इस पुस्तक को मिड-डे द्वारा 2025 की टॉप 16 पुस्तकों में स्थान मिला। इसे टीएओआई अवॉर्ड में ‘बेस्ट बुक ऑफ द ईयर’ का दुर्लभ सम्मान भी मिला।अंतरा को रवि वर्मा अवॉर्ड और इंटरनेशनल टैगोर अवॉर्ड फॉर लिटरेचर जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया है।

*डिकोड द गैप पुस्तक, पीढ़ियों के अंतर पर है एकभावनात्मक सेतु*

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हाल ही में प्रकाशित अंतरा की पुस्तक डिकोड द गैप
विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह पुस्तक दो पीढ़ियों के बीच की अनकही बातों को समझने और उन्हें एक सेतु की तरह जोड़ने का सकारात्मक प्रयास करती है। यह उन सभी लोगों के लिए है जो “तुम कभी नहीं समझोगे…” कहकर चुप हो गए या “हमारे ज़माने में ऐसा नहीं होता था…” सुनकर थक चुके हैं। यह भावनात्मकता और विचारशीलता का एक संगम है जो हमें सिर्फ पीढ़ियों के अंतर को नहीं, बल्कि उनके भीतर छिपे जज़्बातों और इरादों को भी समझने की प्रेरणा देता है।
उनकी पहली पुस्तक हार्मोजिज ऑफइंटरनिटी वर्तमान वास्तविकता को दर्शाती लघु कहानियों का एक संग्रहण है, जो सामाजिक एकता और परस्परता को दर्शाते हुए जीवन में एक-दूसरे का साथ देने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। अंतरा की पुस्तकें अमेज़न और फ्लिपकार्ट सहित सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।

वाक़ई मां शारदे की उपासक रूपी अंतरा जैसी युवती वर्तमान समाज के लिए एक प्रेरणा का स्रोत हैं। संपूर्ण हजारीबाग को आप जैसी युवा मातृशक्ति पर गर्व है। हम माता रानी से प्रार्थना करते हैं कि आपकी सृजनात्मक और लेखन क्षमता दिन-प्रतिदिन प्रबल हो और आप इसी प्रकार अपनी अद्भुत लेखनी के बदौलत हजारीबाग का नाम देश और दुनिया में फैलाती रहें ।

*प्रस्तुति:*
✍ रंजन चौधरी,
सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग संसदीय क्षेत्र ।

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