दुर्गा पूजा से पहले शहर के गड्ढों को भरने और जलमीनार चालू करने की मांग, सीटू का धरना प्रदर्शन
हजारीबाग
सीपीएम जिला कमेटी ने मंगलवार को हजारीबाग उपायुक्त कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना देकर दुर्गा पूजा से पहले शहर के सभी गड्ढों को भरने और जल जीवन मिशन के तहत जिले में बने जलमीनारों को तुरंत चालू करने की मांग की। धरना प्रदर्शन की अध्यक्षता तपेश्वर राम भुइयां और संचालन ईश्वर महतो ने किया। इस अवसर पर जिला सचिव गणेश कुमार सीटू ने कहा कि हजारीबाग, जो कभी “हजार बागों का शहर” कहलाता था, अब “गड्ढों का शहर” बन गया है। उन्होंने कहा कि शहर की कोई भी सड़क ऐसी नहीं है जिस पर गड्ढे न हों, जिसके कारण आए दिन टोटो पलटने की घटनाएं हो रही हैं और लोग घायल हो रहे हैं। इसके बावजूद नगर निगम और नेशनल हाईवे विभाग इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने जल जीवन मिशन की स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठाए। सीटू ने बताया कि प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना के तहत अगस्त 2019 में शुरू हुए इस मिशन का उद्देश्य 2024 तक ग्रामीण घरों तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था, जिसे एक साल के लिए बढ़ा दिया गया।
इसके तहत हजारीबाग जिले के 16 प्रखंडों की 250 पंचायतों के करीब 1325 गांवों में पानी पहुंचाना था। सीटू ने आरोप लगाया कि जिले में अब तक 4596 जलमीनार बनाए गए, यानी औसतन एक गांव में तीन से अधिक, जिन पर लगभग ₹321 करोड़ 72 लाख खर्च हुए। इसके बावजूद अधिकांश गांवों में जलापूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। सदर प्रखंड के प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम चपवा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां मार्च 2023 में जलमीनार तैयार हुआ और 150 घरों में नल कनेक्शन भी दिया गया, लेकिन आज तक पानी सप्लाई नहीं हुआ। ग्रामीण कई बार प्रखंड और विभागीय कार्यालय का चक्कर काट चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं मिला। धरना प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम का यह हाल है तो साधारण गांवों की स्थिति समझी जा सकती है। उन्होंने जिला प्रशासन से चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर शहर के गड्ढों की मरम्मत और जलमीनारों की सप्लाई शुरू नहीं की गई तो पार्टी उग्र आंदोलन करेगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। धरना समाप्ति पर सीपीएम नेताओं ने उपायुक्त को मांग पत्र सौंपा। इस मौके पर गुलाब साव, लक्ष्मी नारायण सिंह, संतोष राम, सुरेश राम, प्रदीप कुमार, मोहम्मद आशिक, मोहम्मद अशरफ, महेश्वरी देवी, धनवा देवी, अनीता देवी, मालती देवी, रीता देवी, निर्मल राम, पिंकी देवी, रानी देवी, कुर्मी देवी समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और महिलाएं शामिल रहीं।

