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आईसेक्ट विश्वविद्यालय में पशुधन उत्पादकता और खेती-बाड़ी को लेकर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

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आईसेक्ट विश्वविद्यालय में पशुधन उत्पादकता और खेती-बाड़ी को लेकर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

हजारीबाग

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आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के तहत कृषि संकाय की ओर से आयोजित पशुधन की उत्पादकता और खेती-बाड़ी से होने वाले लाभ को बढ़ाने हेतु हालिया वैज्ञानिक हस्तक्षेप विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम शनिवार को संपन्न हुआ। इस तीन दिवसीय कार्यशाला में देशभर से कृषि वैज्ञानिक, शोधार्थी और छात्र शामिल हुए।
कार्यशाला के पहले दिन मुख्य अतिथि के रूप में पशुपालन विभाग, हजारीबाग के क्षेत्रीय निदेशक डॉ न्यूटन तिर्की उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को पशुधन प्रबंधन और आधुनिक तकनीक की अहमियत बताई। वहीं आईसीएआर-आरईसीआर, रामगढ़ के डॉ सुधांशु शेखर और आईसीएआर-आईएबीटी, रांची के डॉ गणेश एन आडेराओ ने भी विशेषज्ञ व्याख्यान दिए। दूसरे दिन आईसीएआर-आईएआरआई, बरही की डॉ शिल्पी केरेकट्टा ने वैक्सीनेशन प्रोटोकॉल और इंटीग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट की जानकारी देते हुए कहा कि नियमित डिवार्मिंग व स्वास्थ्य निगरानी से पशुओं में रोग और आर्थिक नुकसान कम होता है।

डॉ वंदना ने प्रसवोत्तर गाय और बछड़ों की देखभाल पर प्रकाश डाला, जबकि बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के डॉ रवींद्र कुमार ने जलवायु-सहनशील पशुपालन को टिकाऊ कृषि की आवश्यकता बताया। बीवीसी-बासु, पटना के डॉ पुष्पेंद्र कुमार सिंह ने प्रजनन तकनीकों की नई संभावनाएं साझा की। तीसरे दिन रांची कृषि महाविद्यालय के डॉ निशांत पटेल ने प्रिसिजन लाइवस्टॉक फार्मिंग पर चर्चा करते हुए कहा कि सेंसर और ऑटोमेटेड सिस्टम किसानों को रियल-टाइम निगरानी का लाभ देते हैं। बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के डॉ शिव वरन सिंह ने ग्रामीण उद्यमिता पर बल देते हुए कहा कि डेयरी, पोल्ट्री व बकरी पालन आधारित वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। वहीं गुमला के डॉ मनमोहन कुमार ने एकीकृत पशुधन-फसल-मत्स्य प्रणाली को लाभकारी बताया।

समापन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो पीके नायक ने कहा कि यह आयोजन भविष्य की कृषि क्रांति की दिशा में ठोस कदम है। कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने कहा कि परंपरा और विज्ञान के मेल से ही ग्रामीण भारत आत्मनिर्भर बनेगा। समकुलपति डॉ गौरव शुक्ला ने छात्रों से कहा कि यह ज्ञान किसानों की जिंदगी में बदलाव लाने का आधार बनेगा। छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ एसआर रथ ने भी इस मौके पर अपने विचार रखे। कृषि संकाय डीन सह कार्यशाला संयोजक डॉ अरविंद कुमार ने कहा कि किसानों और शोधकर्ताओं को नई तकनीक से जोड़ना ही इस कार्यशाला का उद्देश्य था, जो सफलतापूर्वक पूरा हुआ। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
धन्यवाद ज्ञापन कृषि संकाय के सहायक प्राध्यापक प्रभात किरण ने किया।
इस तीन दिवसीय कार्यशाला के सफल संचालन में कार्यशाला संयोजक डॉ अरविंद कुमार, कार्यशाला सचिव डॉ सत्यप्रकाश विश्वकर्मा, संयुक्त समन्वयक प्रभात किरण व फरहीन सिद्दीकी सहित विश्वविद्यालय परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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