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सलूजा गोल्ड इंटरनेशनल स्कूल में बच्चों ने धूमधाम से मनाई गुरुनानक जयंती

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सलूजा गोल्ड इंटरनेशनल स्कूल में बच्चों ने धूमधाम से मनाई गुरुनानक जयंती

गिरिडीह

बुधवार को सलूजा गोल्ड इंटरनेशनल स्कूल के मुख्या शाखा तथा बरगंडा और पचम्बा शाखा में गुरु नानकदेव की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर कक्षा नर्सरी से दूसरी तक के बच्चों विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया और गुरुनानक के जीवन से संबंधित गीत व प्रेरक-प्रसंग प्रस्तुत किए। विद्यालय के मुख्या शाखा पुरे हर्षोउल्लास के साथ गुरुनानक जयंती मनाई गयी। कक्षा नर्सरी से दूसरी तक के बच्चों ने एकजुट होकर गुरुद्वारा का एक प्रारूप पेश किया जहाँ बच्चों एक ऊंचे तख़्त पर गुरुग्रंथ साहिब को रखा और फिर बच्चों ने बारी बारी से पास जाकर माथा टेका और उनसे आशीष लिया। बच्चों परम्परिक परिधानों में रंगा रंग गीत संगीत भी पेश किए और अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया किया।

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विद्यालय के बरगंडा और पचम्बा में भी उत्साहपूर्वक गुरुपर्ब का आयोजन किया गया। यहाँ भी शिक्षकों ने बच्चों द्वारा विशेष प्रार्थना सभा का योजन किया और जाती और धर्म से उठकर उनमे भक्तिभाव प्रदर्शन करने हेतु शिक्षकों ने बच्चों द्वारा गुरुद्वारा का प्रारूप तैयार किया गया जिसमे बच्चों ने पारम्परिक रूप से शीश झुककर गुरुनानक जी को नमन किया और उनसे आशीष लिया। साथ ही बच्चों ने लंगर का पारम्परिक चित्रण प्रस्तुत कर लोगो के प्रति गुरुनानक देव जी द्वारा सिखाये गए सेवा के अमृत मूल्यों को पेश किया। गुरुनानक जयंती के इस उपलक्ष्य में शिक्षकों ने बच्चों को सिख धर्म, गुरुद्वारा, लंगर, सेवा आदि शब्दों से परचित कराया गया I बच्चों को बताया गया कि आज के दिन हम गुरुनानक देव जी के बर्थडे मनाते है और गुरुनानक जयंती को गुरपुरब भी कहते है। गुरुनानक देव जी ने मानवता, समानता, सेवा, समर्पण आदि शब्दों को बताया, सिखाया और उनका अनुकरण करने के लिये कहा।

बच्चों ने बारी बारी से नृत्य , प्रार्थना और गीत प्रस्तुत किये गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। बच्चे पारम्परिक वेश भूषा में विशेष प्रार्थना सभा में सम्मिलित हुए और गुरुनानक जी के आर्दशों के समरण करते हुए कीर्तन प्रस्तुत किये। वही शिक्षकों ने दूसरे तरफ शिक्षकों ने बच्चों को गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं — सेवा, सच्चाई, समानता और विनम्रता — के महत्व को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि वे इन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं और एक अच्छे नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ें।गुरुपुरब का यह आयोजन न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बना, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास और नैतिक शिक्षा को भी सुदृढ़ करने वाला साबित हुआ।

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