हजारीबाग हवलदार हत्याकांड में रिश्तों का कत्ल, बेटे ने दोस्त संग मिलकर रची थी पिता की मौत की साजिश
अनुकंपा नौकरी और संपत्ति की लालच में सोते पिता का रेता गला, तकनीकी जांच से पुलिस ने खोला सनसनीखेज राज
हजारीबाग
हजारीबाग हवलदार हत्याकांड में पुलिस जांच ने रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला चौंकाने वाला खुलासा किया है। झारखंड पुलिस के हवलदार पशुपतिनाथ तिवारी की हत्या के मामले में मृतक के इकलौते पुत्र विशाल तिवारी और उसके एक दोस्त को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिता की हत्या के पीछे अनुकंपा पर नौकरी पाने, पैसों और संपत्ति पर कब्जा जमाने की लालच और लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक तनाव की अहम भूमिका रही। पुलिस के अनुसार, 19 दिसंबर की शाम दोनों आरोपी हजारीबाग से बाइक पर सवार होकर निकले और देर रात भोजपुर (बिहार) के भगवतपुर गांव पहुंचे। वहां सो रहे पशुपतिनाथ तिवारी की चाकू से गला रेतकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। वारदात के बाद आरोपियों ने सबूत मिटाने के इरादे से चाकू और दस्ताने सोन नदी में फेंक दिए।
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है कि यह हत्या अचानक नहीं की गई थी। पुलिस का दावा है कि करीब दो साल पहले भी हवलदार की हत्या की साजिश रची गई थी। उस समय बाइक दुर्घटना में मारने की योजना बनाई गई थी, जबकि परिवार के अन्य सदस्य को भी रास्ते से हटाने की तैयारी की गई थी। हजारीबाग पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूतों के आधार पर पहले आरोपी दोस्त को हजारीबाग से गिरफ्तार किया। पूछताछ में मिले इनपुट के बाद बेटे विशाल तिवारी को भी हिरासत में लिया गया, जहां दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। एसडीपीओ रंजीत कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता में पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस मृतक की पत्नी की भूमिका की भी गहन जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए ठोस साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। यह हत्याकांड न केवल एक जघन्य अपराध है, बल्कि पारिवारिक रिश्तों पर भी गहरा सवाल खड़ा करता है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

