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मनरेगा को रद्द करने व नए वी. जी. रामजी राम बिल के विरोध में झामुमो का धरना

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मनरेगा को रद्द करने व नए वी. जी. रामजी राम बिल के विरोध में झामुमो का धरना

हजारीबाग।

मनरेगा को रद्द कर उसके स्थान पर नए वी. जी. रामजी राम बिल को लागू किए जाने के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से बुधवार को पुराना समाहरणालय स्थित धरना स्थल पर एक दिवसीय धरना दिया गया। धरना की अध्यक्षता झामुमो जिला अध्यक्ष संजीव बेदिया ने की, जबकि संचालन जिला सचिव नीलकंठ महतो ने किया। धरना में पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मजदूर शामिल हुए।

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धरना को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष संजीव बेदिया ने कहा कि मनरेगा एक ऐसा कानून था, जो ग्रामीण मजदूरों को काम का सार्वभौमिक अधिकार देता था। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला कोई भी व्यस्क व्यक्ति, जो अकुशल शारीरिक श्रम करने को तैयार हो, उसे रोजगार देने की गारंटी थी। लेकिन नए वी. जी. रामजी राम बिल में इस मूल भावना को ही समाप्त कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि नए बिल की धारा 5(1) के अनुसार अब राज्य सरकारें केवल उन्हीं ग्रामीण क्षेत्रों में काम उपलब्ध कराएंगी, जिन्हें केंद्र सरकार अधिसूचित करेगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि किसी क्षेत्र को केंद्र सरकार अधिसूचित नहीं करती है, तो वहां के लोगों को रोजगार का कोई अधिकार नहीं मिलेगा। इस तरह यह योजना एक केंद्र सरकार की इच्छा पर चलने वाली विवेकाधीन योजना बनकर रह जाती है, जो संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार है।

संजीव बेदिया ने आगे कहा कि नए बिल में कई ऐसी खामियां हैं, जो इसे मजदूरों और गरीब ग्रामीणों के लिए अनुपयोगी और नुकसानदायक बनाती हैं। मनरेगा जहां रोजगार की कानूनी गारंटी देता था, वहीं नया बिल उस गारंटी को समाप्त करता है। इससे सबसे अधिक नुकसान गरीब, दलित, आदिवासी और ग्रामीण मजदूरों को होगा।

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वहीं धरना को संबोधित करते हुए जिला सचिव नीलकंठ महतो ने कहा कि मनरेगा का केवल नाम ही नहीं बदला गया है, बल्कि उसकी आत्मा के साथ भी खिलवाड़ किया गया है। मनरेगा कानून ग्रामीणों को मांग पर काम देने की व्यवस्था करता था और रोजगार सुनिश्चित करता था, जबकि नए बिल में न तो काम की गारंटी है और न ही मजदूरों के हितों की सुरक्षा।

नीलकंठ महतो ने कहा कि नया बिल लागू होने से एक ओर जहां राज्य सरकारों पर अतिरिक्त वित्तीय और प्रशासनिक भार पड़ेगा, वहीं दूसरी ओर मजदूरों को समय पर काम और मजदूरी मिलने में भी परेशानी होगी। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह मजदूर विरोधी नीतियों के माध्यम से गरीबों के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

धरना के दौरान झामुमो कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मांग की कि मनरेगा कानून को यथावत रखा जाए तथा नए वी. जी. रामजी राम बिल को वापस लिया जाए। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने मजदूरों के अधिकारों के साथ इस तरह का खिलवाड़ बंद नहीं किया, तो झामुमो राज्यव्यापी आंदोलन तेज करेगी।धरना में जिला अध्यक्ष संजीव बेदिया, जिला सचिव नीलकंठ ममहतो, केंद्रीय सदस्य गौरव पटेल,सुनील शर्मा,संजय सिंह, प्रवक्ता कुणाल यादव, इचाक प्रखंड अध्यक्ष राजेश मेहता, चौपारण प्रखंड अध्यक्ष उज्जवल सिंह ,सदर प्रखंड अध्यक्ष राजकुमार मेहता, जिला उपाध्यक्ष रणजीत मेहता, इजहार अंसारी, सुनील शर्मा, सत्येंद्र मेहता, गंगेश्वर मेहता, मनोहर राम, अभिषेक मेहता, सतीश सिंह, संतोष कुमार, सिकंदर राम, सरफराज अंसारी अनमोल मरांडी, राजेंद्र कुशवाहा कपिल देव चौधरी, संजय प्रजापति दीपक राय, नईम राही, राजा खान, रोहित रजक,लड्डू यादव, साजन कुमार, मोहन सोरेन, श्वेता दुबे, सुनीता देवी, जसू देवी, प्यारी देवी समेत झारखंड मुक्ति मोर्चा के कई नेता व कार्यकर्ता मौजूद थे।

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