डीएवी पब्लिक स्कूल बरही के शिक्षक ललन यादव को अपनी पुस्तक हजारीबाग के लोक कला के लिए मिला विशेष सम्मान
कला, संस्कृति और धरोहर का संरक्षण आज की आवश्यकता है : प्राचार्य डॉ आशुतोष कुमार मैढ़
बरही
पूर्वोदय आर्ट फाऊंडेशन के बैनर तले तूलिका नामक दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला आदिवासी संस्कृति केंद्र सोनारी जमशेदपुर में आयोजित किया गया। इस कार्यशाला में डीएवी पब्लिक स्कूल बरही के कला शिक्षक ललन यादव को अपनी पुस्तक हजारीबाग के लोक कला के लिए विशेष सम्मान दिया गया। जिसमें देश-विदेश के 110 कलाकारों ने अपनी भागीदारी निभाई। इस कार्यशाला में डीएवी पब्लिक स्कूल बरही के तीन छात्राओं मिताली, कशिश और तनु ने भी बेहतर प्रदर्शन किया जिसके लिए उन्हें सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉक्टर उत्तमा दीक्षित डीन बनारस हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण उपस्थित रही। डीएवी पब्लिक स्कूल बरही के प्राचार्य डॉक्टर आशुतोष कुमार मैढ़ भी सह अतिथि के रुप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं आदिवासी संस्कृति और धरोहर को बचाने के लिए सदैव प्रयासरत रहती है। अतः हम सबों का यह कर्तव्य हो जाता है कि इस प्रकार की कार्यशालाएं अत्यधिक आयोजित करते हुए इसमें जन भागीदारी को बढ़ाना होगा तभी हम इस संस्कृति को अक्षुण्ण रख सकते हैं। कला शिक्षक ललन यादव ने इस कार्यशाला में कला को जीने की कला सीखाने का उदाहरण प्रस्तुत किया। अन्य अतिथियों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आदिवासी संस्कृति हमारी धरोहर है और इसका संरक्षण भी हमारी नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। अतः इस कला का जितना अधिक से अधिक विकास होगा, जितना लोग इसे अपनाएंगे उतना ही यह कला बच पाएगी।इसलिए हमें इस तरह की कार्यशाला में अपनी भागीदारी अवश्य निभानी चाहिए।

