अखिल भारतीय हड़ताल को सफल बनाने के लिए मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स की बैठक सम्पन्न
हजारीबाग
देश के 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड के विरोध में 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित अखिल भारतीय हड़ताल को सफल बनाने के लिए हजारीबाग में मेडिकल सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स यूनियन (सीआईटीयू) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता यूनियन के जिला अध्यक्ष सुदीप चटर्जी ने की। बैठक में जिला सचिव विजय कुमार ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने सेल्स प्रमोशन कर्मचारी सेवा शर्त अधिनियम 1976 को समाप्त कर दिया है, जिससे देश भर के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स और सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि यह कानून कर्मचारियों की सुरक्षा का एक मजबूत आधार था, जिसे खत्म कर दिया गया है। बैठक के मुख्य अतिथि गणेश कुमार, संयुक्त सचिव सीआईटीयू, हजारीबाग ने विस्तार से बताया कि केंद्र सरकार ने 15 श्रम कानूनों को विलोपित कर 29 अन्य कानूनों को समाप्त कर दिया है।
इस तरह कुल 44 श्रम कानूनों को खत्म कर उनके स्थान पर चार लेबर कोड लागू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इनमें श्रमजीवी पत्रकार वेतन अधिनियम 1958, मातृत्व लाभ अधिनियम 1961, बोनस भुगतान अधिनियम 1965, समान मजदूरी अधिनियम 1976, वेतन भुगतान अधिनियम और औद्योगिक विवाद अधिनियम 1926 जैसे महत्वपूर्ण कानून भी शामिल हैं। गणेश कुमार ने कहा कि 2019 में वेज कोड और 2020 में तीन लेबर कोड बनाए गए, जो देश के मजदूरों, कर्मचारियों और अधिकारियों सभी के लिए काला कानून साबित होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि इन कोडों से युवाओं को स्थायी नौकरी नहीं मिलेगी और देश में फिक्स्ड टर्म रोजगार की व्यवस्था लागू हो जाएगी, जिसमें नौकरी की कोई गारंटी नहीं होगी। उन्होंने आगे कहा कि इन लेबर कोड के तहत न्यूनतम मजदूरी तय करने का अधिकार राज्य सरकारों से छीन लिया गया है।
मजदूरों के संगठन बनाने, अपनी मांगों के लिए हड़ताल करने और न्याय के लिए कोर्ट जाने के अधिकारों को भी सीमित कर दिया गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रशिक्षु (ट्रेनिंग करने वाले) कर्मचारियों को इन कानूनों से बाहर रखा गया है, जिससे उनके शोषण का रास्ता खुल जाएगा। बैठक में अखिलेश मिश्रा, साकेत कुमार, सुमन शेखर, सिकंदर शर्मा, त्रिलोक कुमार, राकेश आनंद, पंकज कुमार, अनंत पांडेय सहित जिले भर के बड़ी संख्या में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स उपस्थित रहे। अंत में यह निर्णय लिया गया कि हड़ताल को सफल बनाने के लिए इस सप्ताह के भीतर सभी यूनियनों की एक संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी।

