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शाहिद को भूली नगर निगम, बटेश्वर मेहता के हस्तक्षेप के बाद धूल से लनी प्रतिमा को साफ किया गया : सीटू

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शाहिद को भूली नगर निगम, बटेश्वर मेहता के हस्तक्षेप के बाद धूल से लनी प्रतिमा को साफ किया गया : सीटू

हजारीबाग

1855 क्रांति के महानायक नीलांबर पीतांबर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके 203 वीं जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया . माल्यार्पण करने वालों में बटेश्वर प्रसाद मेहता राज्य अध्यक्ष स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच , सी पी एम के जिला सचिव गणेश कुमार सीटू ,तपेश्वर राम भुइयां ,प्रेस क्लब हजारीबाग के कार्यकारिणी सदस्य अभिषेक पांडे, गोवर्धन प्रजापति, मुकेश कुमार सिंह , राहुल कुमार, प्रभु गंझू , राजेंद्र गंझू , विजय भोक्ता, घनश्याम पासवान ,रोहित मेहता और रामावतार भगत सहित कई लोग शामिल थे।

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बटेश्वर मेहता गणेश कुमार सीटू ने बताया कि शहीद नीलांबर पीतांबर का जन्म 1823 में पलामू जिले के भंडरिया प्रखंड के चेमू सनईया गांव में हुआ था .इनके पिता का नाम चेतू सिंह भोक्ता था . इन दोनों भाइयों ने अंग्रेजी हुकूमत के सोशल, दमन, अन्याय के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया था। 21 अक्टूबर 1857 को दोनों भाइयों के नेतृत्व में चैनपुर, शाहपुर तथा लेस्लीगंज स्थित अंग्रेजों के कैंप पर आक्रमण किया जहां अंग्रेजों को काफी नुकसान उठाना पड़ा और वहां से भागना पड़ा .13 फरवरी 1858 को पहली बार डाल्टन अपने सैनिकों के साथ नीलांबर पीतांबर के गांव के चेमू पहुंचा और गांव को तीनों ओर से घेर कर हमला कर दिया। हमले का जवाब इन दोनो के नेतृत्व में गांव वालो जम दिया। इस दौरान भी अंग्रेज सैनिकों को कड़ा विरोध का सामना करना पड़ा .डाल्टन 10 दिनों तक उनके गांव को घेरे रखा पर इनके गोरिल्ला युद्ध के सामने डाल्टन और उसके सैनिक ठीक नहीं पाए। डाल्टन के कई सैनिक मारे गए और कई घायल हो गया।

इससे घबराकर डाल्टन ने 10 दिन के बाद 23 फरवरी 1858 को अपने बचे खुचे सैनिकों को लेकर वापस लौट गया .पूरा पलामू प्रमंडल और आसपास के इलाके में नीलांबर पीतांबर के नाम से अंग्रेज सैनिक और अफसर थर थर कापते थे . 28 मार्च 1859 को इनको फांसी दी गई। ऐसे महान नायकों के जयंती को हजारीबाग नगर निगम के अधिकारी भूल गए थे और 12:00 बजे तक धूल से सने प्रतिमा को साफ नहीं किया गया था। यह देख बटेश्वर प्रसाद मेहता ने नाराजगी व्यक्त करते हुए तुरंत नगर निगम के कमिश्नर से बात किया तब कहीं जा कर के नगर निगम वाले 12:30 बजे एक टैंकर भेज करके प्रतिमा को साफ किया है . देश के ऐसे महान नायकों के जयंती और शहादत दिवस को भूल जाना अनुचित है।

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