हजारीबाग में नहीं थम रहा हाथी मानव का द्वंद्व, एक और किसान की जान गई
सांसद मनीष जायसवाल के निर्देश पर प्रशासन सक्रिय, घायल महिला का इलाज जारी, मुआवजा प्रक्रिया शुरू
सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन ने पहुंचे अस्पताल, कराया पोस्टमार्टम, घायल महिला का जाना कुशलक्षेम
हजारीबाग
हजारीबाग में मानव और हाथियों के बीच बढ़ता टकराव एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ। बुधवार देर रात हजारीबाग सदर विधानसभा क्षेत्र के सदर प्रखंड अंतर्गत मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चुटियारो गांव में हाथियों के हमले में एक किसान की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। यह हृदयविदारक घटना क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे मानव और हाथी के द्वंद्व की संघर्ष की गंभीरता को उजागर करती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार चुटियारो गांव निवासी आदित्य राणा (लगभग 50 वर्ष) अपनी पत्नी शांति देवी के साथ कुम्भियाटांड़ स्थित अपने टमाटर के खेत की देखरेख के लिए गए थे। इसी दौरान अचानक हाथियों के एक झुंड ने उन पर हमला कर दिया। हाथियों ने आदित्य राणा को पटक-पटक कर मार डाला, जबकि उनकी पत्नी शांति देवी को गंभीर रूप से घायल कर दिया। घायल महिला को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
मृतक आदित्य राणा अपने पीछे तीन बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं। घटना की सूचना मिलते ही हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल ने वन विभाग के अधिकारियों को तत्काल अवगत कराया। इसके बाद वन विभाग की टीम अस्पताल पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
सांसद मनीष जायसवाल के निर्देश पर हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने अस्पताल पहुंचकर घायल महिला से मुलाकात की और कुशलक्षेम जाना। उन्होंने चिकित्सकों से बातचीत कर बेहतर इलाज सुनिश्चित करने का आग्रह किया। इलाज कर रहे चिकित्सक डॉ. अभिषेक कुमार ने बताया कि घायल महिला फिलहाल खतरे से बाहर हैं। इधर वन विभाग की ओर से त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतक के परिजनों को अंत्येष्टि के लिए 25 हजार रुपये की सहायता राशि तत्काल प्रदान की गई है। विभाग ने बताया कि शेष मुआवजे का भुगतान निर्धारित प्रक्रिया के तहत शीघ्र किया जाएगा। यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि मानव और हाथी संघर्ष केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि जंगलों के अतिक्रमण और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के लगातार सिमटने का परिणाम है। सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने कहा कि हाथियों से टकराव का समाधान संघर्ष नहीं, बल्कि सतर्कता और जागरूकता है। हाथियों के पारंपरिक मार्गों में मानवीय दखल कम करना और समय रहते ग्रामीणों को सतर्क करना ही ऐसी घटनाओं को रोक सकता है। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से अपील किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में हाथियों की गतिविधि की सूचना मिलते ही हाथी भगाओ दस्ता को सक्रिय करें, संभावित मार्गों पर निगरानी बढ़ाएं और लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए लगातार जागरूक करते रहें। जागरूकता, सतर्कता और समय पर प्रशासनिक पहल ही मानव जीवन को बचाने का सबसे प्रभावी उपाय हो सकता है।

