नशा व्यक्ति ही नहीं, पूरे परिवार की बर्बादी का कारण : शेष नाथ सिंह
बब्लू खान
लातेहार।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार, लातेहार श्री शेष नाथ सिंह के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा संचालित “जीवन को हां कहें—नशे को ना कहें” अभियान के पांचवें दिन विशेष मार्गदर्शन सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का उद्देश्य युवाओं एवं आम नागरिकों को नशीली दवाओं के दुष्परिणामों, उनसे जुड़े कानूनी प्रावधानों तथा समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान नशीली दवाओं के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दुष्परिणामों, उनसे जुड़े जोखिमों तथा नशीली दवाओं से संबंधित कानूनों और दंडात्मक प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही नालसा की हेल्पलाइन संख्या 15100 के बारे में बताया गया और कहा गया कि किसी भी प्रकार की विधिक सहायता, परामर्श अथवा मार्गदर्शन के लिए इस हेल्पलाइन का निःशुल्क उपयोग किया जा सकता है। कार्यक्रम स्थल पर बैनर एवं पोस्टर लगाए गए तथा आमजनों के बीच सूचनात्मक पर्चों का वितरण भी किया गया।
प्रेस-मीडिया के माध्यम से श्री शेष नाथ सिंह ने कहा कि आज लगभग 70 प्रतिशत से अधिक अपराध नशे की हालत में किए जाते हैं या अपराध को अंजाम देने से पूर्व नशे का सेवन किया जाता है। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति को केवल शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से ही नहीं तोड़ता, बल्कि उसके पूरे परिवार को बर्बादी की ओर धकेल देता है।
उन्होंने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखते हुए उन्हें जागरूक, आत्मनिर्भर बनाना और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करना है, ताकि नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सके। साथ ही उन्होंने छात्रों से नशा मुक्ति के संदेशवाहक बनकर समाज के अन्य लोगों को भी जागरूक करने की अपील की।

