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महुआडांङ में बिजली पोल घोटाले से मचा हड़कंप, ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश — अधिकारियों ने अब तक नहीं लिया संज्ञान

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महुआडांङ में बिजली पोल घोटाले से मचा हड़कंप, ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश — अधिकारियों ने अब तक नहीं लिया संज्ञान

बब्लू खान

लातेहार

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महुआडांङ प्रखंड में बिजली आपूर्ति सुदृढ़ करने के नाम पर चल रहा पोल गाड़ने का कार्य अब गंभीर अनियमितता और घोर लापरवाही का मामला बन गया है। नंगे तार हटाकर कवर तार लगाने की योजना के तहत झारखंड बिजली विभाग द्वारा अधिकृत संवेदक के माध्यम से सीमेंटेड विद्युत पोल लगाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कार्य में सरकारी मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।ग्रामीणों का आरोप है कि पोल गाड़ने के दौरान न तो तय गहराई का पालन हो रहा है और न ही मजबूत फाउंडेशन तैयार किया जा रहा है पोल के लिए खोदे गए गड्ढों में केवल मिट्टी भर दी जा रही है और ऊपर से महज तीन से चार इंच पीसीसी ढलाई कर औपचारिकता निभाई जा रही है।

तकनीकी जानकारों के अनुसार यह तरीका पूरी तरह अवैज्ञानिक, असुरक्षित और खतरनाक है, जिससे किसी भी समय पोल गिरने की आशंका बनी हुई है सबसे गंभीर सवाल यह है कि इस पूरे कार्य के दौरान न कोई जूनियर इंजीनियर, न कोई तकनीकी अधिकारी और न ही कोई जिम्मेदार पदाधिकारी मौके पर मौजूद रहता हैग्रामीणों का कहना है कि संवेदक पूरी तरह मनमाने ढंग से काम कर रहा है और विभागीय निगरानी नाम मात्र की भी नहीं है इससे यह संदेह और गहरा गया है कि सरकारी राशि का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह घटिया तरीके से पोल लगाए गए तो आंधी, तूफान या तेज बारिश में इनके गिरने से बड़ी दुर्घटना तय है। स्कूल जाने वाले बच्चे, महिलाएं और राहगीर हर समय खतरे में हैं। इसी कारण महुआडांङ के ग्रामीणों में भय के साथ-साथ तेज आक्रोश देखने को मिल रहा है।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों और ग्रामीणों के विरोध के बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने औपचारिक रूप से संज्ञान नहीं लिया है। बिजली विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या निरीक्षण सामने नहीं आया है। विभागीय एसडीओ का यह कहना कि “कहीं ढलाई कम है तो कहीं अधिक है” ग्रामीणों को और आक्रोशित कर रहा है।

लोगों का सवाल है कि जब विभागीय मानक पहले से तय हैं, तो “कम–ज्यादा” कैसे स्वीकार्य हो सकता है ग्रामीण इसे लीपापोती और जिम्मेदारी से बचने का प्रयास बता रहे हैं ग्रामीणों ने विधायक रामचंद्र सिंह, विभागीय अधिकारियों और प्रशासन से तत्कालहस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मांग है कि जब तक निष्पक्ष और तकनीकी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक पोल गाड़ने का कार्य तुरंत रोका जाए और दोषी संवेदक व जिम्मेदारअधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए विधायक रामचंद्र सिंह ने कहा है कि कार्य सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप ही होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी प्रकार की अनियमितता के पक्ष में नहीं हैं और ग्रामीण यदि लिखित शिकायत देते हैं तो उचित और सख्त कार्रवाई की जाएगी।अब सवाल यह है कि क्या झारखंड बिजली विभाग महुआडांङ में सामने आए इन गंभीर आरोपों पर आखिरकार संज्ञान लेगा, या फिर यह मामला भी कागजों में ही दबा दिया जाएगा।महुआडांङ के ग्रामीण साफ कह रहे हैं—यह मुद्दा अब सिर्फ घटिया काम का नहीं, बल्कि सीधे लोगों की जान-माल की सुरक्षा से जुड़ा है।

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