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जल निकासी को लेकर किसानों का आक्रोश, उपायुक्त के आदेश पर पथ निर्माण विभाग हरकत में

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जल निकासी को लेकर किसानों का आक्रोश, उपायुक्त के आदेश पर पथ निर्माण विभाग हरकत में

हुसैनाबाद/पलामू:

केन्द्रीय सड़क निधि से स्वीकृत सड़क निर्माण कार्य में जल निकासी की अनदेखी और घटिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों व किसानों का आक्रोश अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। मामला मोहम्मदगंज प्रखंड के भजनिया से होते हुए सहारविहरा, बरडीहा, पंसा, कोरियाडीह, अधौरा रानीदेवा, रजौंधा, कबरा कलां, कबरा खुर्द, परता, सलेमपुर, सजवन एवं हैदरनगर तक बन रही सड़क से जुड़ा है।

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ग्रामीणों ने इस संबंध में उपायुक्त, पलामू को लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया था कि सड़क निर्माण के दौरान संवेदक द्वारा मिट्टी भराई तो कर दी गई है, लेकिन कहीं भी जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। इससे रजौंधा, कबरा कलां व आसपास के गांवों के खेतों में पानी जमा होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते जल निकासी नहीं कराई गई तो जूही आहर, चमरहरी आहर, अधौरा माइनर, केसलिया आहर और लंगड़ी आहर जैसे जलस्रोत प्रभावित होंगे, जिससे फसलों को भारी नुकसान होगा और सड़क भी जल्द क्षतिग्रस्त हो सकती है।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में बिना मानक के गिट्टी-बालू का उपयोग, पर्याप्त पानी व मिश्रण के अभाव में किया जा रहा है। इससे सड़क की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। संवेदक के साइड इंचार्ज द्वारा यह कहे जाने के बाद कि प्राक्कलन में जल निकासी का प्रावधान नहीं है, किसानों में नाराजगी और बढ़ गई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त पलामू के आदेश पर पथ निर्माण विभाग छतरपुर डिवीजन के सहायक अभियंता ज्ञान प्रकाश ने गुरुवार को कार्य स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित किसानों से मुलाकात कर समस्याओं को चिन्हित किया और समाधान का भरोसा दिलाया। सहायक अभियंता ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसानों की मांग पूरी तरह जायज है और जल्द ही कनीय अभियंता को भेजकर जल निकासी समेत अन्य तकनीकी खामियों का समाधान कराया जाएगा।
मौके पर मौजूद किसानों राम प्रवेश सिंह,शेख कलिम,नरेश पासवान, अनुज शर्मा, बिगु यादव, दिनेश पासवान,अशोक पासवान,कामेश्वर पासवान एवं राजकेश पासवान आदि ने सहायक अभियंता से साफ शब्दों में कहा कि यदि मिट्टी कार्य के बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे काम बंद कराने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पथ निर्माण विभाग की होगी।ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद न केवल जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित होगी, बल्कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता में भी सुधार होगा, ताकि क्षेत्र को एक टिकाऊ और सुरक्षित सड़क मिल सके।

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