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नीलामी के सात साल बाद भी लिक्विडेटर ने बंद पड़े जपला सीमेंट फैक्ट्री के मजदूरों का बकाया वेतन का नहीं कराया भुगतान ,अब क्वार्टर खाली कराने का आदेश

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नीलामी के सात साल बाद भी लिक्विडेटर ने बंद पड़े जपला सीमेंट फैक्ट्री के मजदूरों का बकाया वेतन का नहीं कराया भुगतान ,अब क्वार्टर खाली कराने का आदेश

हुसैनाबाद,पलामू:

पलामू जिला के जपला सीमेंट फैक्ट्री नीलामी के सात साल के बाद भी फैक्ट्री के मजदूरों का बकाया मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया. नीलामी के बाद मजदूरी भुगतान कराने के लिए अदालत के द्वारा नियुक्त लिक्विडेटर(परिसमापक) को यह जिम्मेदारी दी गयी थी. निर्देश दिया गया था कि मजदूरों के बकाया मजदूरी का भुगतान लिक्विडेटर नीलामी से प्राप्त राशि के माध्यम से करें. लेकिन मजदूरी भुगतान तो नहीं किया गया अब वहां मजदूरी भुगतान के आस में क्वार्टर में रहने वाले मजदूरों को क्वार्टर को खाली कराने को लेकर दबाव बनाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि पटना हाईकोर्ट ने परिसमापनाधीन सोन वैली पोर्टलैंड सीमेंट लिमिटेड से जुड़ी संपत्तियों के मामले में पलामू जिला उपायुक्त को निर्देश दिया है कि वे जपला एवं आसपास स्थित कंपनी के करीब 400 आवासीय क्वार्टर का कब्जा लिक्विडेटर को दिलाने में सहयोग करें.सोन वैली पोर्ट लैंड जपला सीमेंट फैक्ट्री की 200 एकड़ भूमि पहले ही नीलाम हो चुकी है. लेकिन फैक्ट्री के क्वार्टर जिसमें मजदूरों और उनके परिवार रह रहे है वह क्वॉर्टर अभी तक लिक्विडेटर के कब्जे में नहीं आया है. इस क्वार्टर में वही लोग रह रहे है जिन्होंने दशकों तक इस फैक्ट्री में काम किया था लेकिन मजदूरों का बकाया वेतन नहीं मिल सका.

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मई 2018 में नीलाम कर दी गयी थी जपला सीमेंट फैक्ट्री

मजदूरों का कहना है 28 मई 1992से जपला सीमेंट फैक्ट्री के प्रबंधक और और तत्कालीन बिहार सरकार की लापरवाही के कारण पटना हाइकोर्ट के आदेश पर नीलामी द्वारा मई 2018 में नीलाम कर दी गयी थी. उस वक्त मजदूरों ने इसका जोरदार आंदोलन किया था.इस पर उस वक्त के तत्कालीन पलामू उपायुक्त की पहल पर मजदूरों और स्थानीय प्रशासन की वार्तालाप हुई थी. जिसमें लिक्विडेटर के प्रतिनिधि भी मौजूद थे. उन्होंने आश्वासन दिया था कि पहले मजदूरों का बकाया वेतन का भुगतान किया जायेगा. आरोप है कि एक साजिश के तहत फैक्ट्री के मजदूरों का बकाया राशि दिलाने के लिए फॉर्म भरवाया गया था, जो पटना लिक्विडेटर के यहां जमा करना था. लोगों ने फॉर्म भर कर पटना कार्यालय में भेजा लेकिन सात साल बाद भी बकाया वेतन का भुगतान लिक्विडेटर द्वारा नहीं किया गया. मजदूरों ने कहा कि पहले पलामू उपायुक्त लिक्विडेटर से मजदूरों का बकाया राशि दिलवाने के दिशा में काम करें. अन्यथा बेबस और लाचार मजदूर का बकाया वेतन नहीं मिल सकेगा और उनकी जिंदगी भी नीलामी की बलि चढ़ जायेगी . मजदूरों ने इस मामले में झारखंड सरकार के मुख्य मंत्री , सांसद बीडी राम और स्थानीय विधायक संजय कुमार सिंह यादव से भी सहयोग करने की गुहार लगाई है.

कौन है लिक्विडेटर
लिक्विडेटर अदालत द्वारा नियुक्त वह व्यक्ति होता है जो किसी कंपनी या व्यवसाय के दिवालिया होने पर उसकी संपत्ति को बेचकर कर्जदारों ,शेयरधारकों अथवा मजदूरों के बीच राशि वितरित करने का काम करता है.

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