अपने अंदर के स्वभाव या धर्म का अनुसरण करना ही उत्तम मार्ग है: गोविंद दास शास्त्री
पोटका से सुरेश कुमार महापात्र की रिपोर्ट
भगवान शिव के क्रोध रूप को झांकी के माध्यम से किया गया प्रस्तुत
कोवाली थाना के महूलड़िहा गांव में श्री श्री राधा गोविंद भागवत सेवा संघ दक्षिण पोटका की ओर से सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा भक्ति सह ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवसीय प्रवचन की शुरुआत भागवत भगवान की आरती, मंगलाचरण एवं संकीर्तन के साथ शाम 4:30 बजे शुरू हुई। जिसमें कथावाचक गोविंद दास शास्त्री जी महाराज ने भगवान के विराट रूप का वर्णन, वरुण देव की कथा, मनुष्य जीवन का उद्देश्य, सृष्टि रचना और भागवत तथा सती माता की कहानी शिव तांडव की चर्चा करते हुए कहा अपने अंदर के स्वभाव या धर्म का अनुसरण ही सबसे सुरक्षित और सही पथ है। दूसरों का अनुकरण खुद के आध्यात्मिक उन्नति के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने सती माता की कहानी को एक प्रेम कहानी ही नहीं बल्कि सृष्टि के सबसे बड़ी रहस्य में से एक बताया। जहां भगवान शिव का क्रोध पूरे ब्रह्मांड को हिला देता है जहां पिता दक्ष प्रजापति का अहंकार पूरे वंश को नाश कर देता है एवं जहां एक पत्नी का आत्म सम्मान मृत्यु से भी ऊपर साबित होता है। भगवान शिव के क्रोध रूप को झांकी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। सभी भक्त मंडली एकाग्रता के साथ भागवत कथा का श्रवण किया।

