भगवान श्री कृष्ण के बाल लीलाओं में सरोवर हुआ हल्दी पोखर भागवत स्थल
पोटका से सुरेश कुमार महापात्र
सनातन धर्म की रक्षा तभी संभव है जब जब हर माता-पिता अपने संतान को संस्कारी बनाएं :पं उमाशंकर शुक्ला जी महाराज
पोटका प्रखंड अंतर्गत श्रीमद् भागवतकथा समिति हल्दीपोखर के ग्राम वासियों की ओर से उड़िसा रोड़ पर आयोजित सप्तम दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवसीय शनिवार को कथा स्थल में भक्तों की उमड़ी भीड़।कथावाचक पंडित उमाशंकर शुक्ला जी महाराज ने व्यास पीठ पर कथा की शुरुआत भागवत कि मंगलारती के साथ मंगलाचरण करते हुए भगवान श्री कृष्ण के बाल लीलाओं का सरोवर काराये। जिसमें सरकटासुर बोध की कथा, तृणावर्त उद्धार, माखन चोरी की लीला , अधासुर बोध, ब्रह्म मोह की कथा, पुतना बोध एवं गिरि गोवर्धन पूजा की कथा सुनाएं।श्री कृष्ण की बाल लीलाएं समाज को निश्छल प्रेम, आनंद सामान्य व अहंकार त्यागने का संदेश देती है। एवं माखन चोरी, गोवर्धन पूजा जैसी घटनाएं यह सिखाती है कि ईश्वर को समर्पण एवं भक्ति के माध्यम से पाया जा सकता है न कि केवल ज्ञान से। यह लीलाएं निर्दोषता, वात्सल्य और समानता जैसे जात-पात से ऊपर को बढ़ावा देने का संदेश देती है जो मानवीय संबंधों एवं सामाजिक समरसता को मजबूत करती है। पुतना बोध की कथा प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए महाराज ने कहे बुराई चाहे कितनी भी ताकतवर या क्षद्म में रूप में आए सत्य और ईश्वर के आगे उसका अंत निश्चित है।साथ ही साथ ब्रह्मा विमोहन लीला भागवत पुराण की एक प्रसिद्ध कथा पर वर्णन करते हुए बताएं की ब्रह्मा जी को श्री कृष्ण के परमेश्वर होने पर संदेह हुआ तो उन्होंने परीक्षा लेने के लिए श्री कृष्ण के ग्वाल- बालों और बछड़ों को चुरा कर एक गुफा में छुपा दिया। श्री कृष्ण ने स्वयं ही उन सबका रूप धारण कर एक वर्ष तक ब्रज में लीला की । महाराज ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं पर बखान करते हुए हर अभिभावक को अपने संतान पर संस्कार की छाप छोड़ने की बात कही।

