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महुलडीहा में भागवत कथा के सष्टम दिवस की कथा में कंस वध एवं कृष्ण रुक्मणी विवाह प्रसंग पर दिखाई गई झांकी रही आकर्षण का केंद्र

Suresh Mahapatra
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महुलडीहा में भागवत कथा के सष्टम दिवस की कथा में कंस वध एवं कृष्ण रुक्मणी विवाह प्रसंग पर दिखाई गई झांकी रही आकर्षण का केंद्र

 

 

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पोटका से सुरेश कुमार महापात्र की रिपोर्ट 

 

 

 

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कोवाली अंतर्गत मुहूलड़िहा गांव में श्री श्री राधा गोविंद भागवत सेवा संघ दक्षिण पोटका की ओर से सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा भक्ति सह ज्ञान यज्ञ कि सष्टम दिवसीय गुरूवार को भागवत कथा की शुरुआत भगवान की आरती, मंगलाचरण एवं संकीर्तन के साथ शाम 5 बजे आरंभ हुई। जिसमें कथावाचक गोविंद दास शास्त्री जी महाराज ने कथा में भक्त मंडलियों को राधा कुंड के प्रकाश, गोचरण लीला, मथुरा गमन, कंस वध, द्वारिका गमन, कृष्ण रुक्मणी विवाह आदि प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहा कि जीवन में समस्या हर रोज खड़ी होती है, पर जीत जाते हैं वे लोग जिनकी सोच बड़ी होती है। जिनके रक्षक हो भगवान, उसे कोई मार नहीं सकता और जगन्नाथ का दास जगत में हार नहीं सकता। कंस वध प्रसंग पर व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा अहंकार को त्याग कर भगवान के शरण में जाने से ही कल्याण होता है। उन्होंने लीला और क्रिया के अंतर को समझाते हुए बताएं अभिमान और सुखी रहने की इच्छा क्रिया कहलाती है एवं दूसरों को सुखी रखने की इच्छा लीला है। सांसारिक जीवन में सुखी रहने के लिए महाराज ने इंसान को पांच गलती छोड़ने की सलाह दी। खर्च करना है तो कमाना सीखिए, लिखना है तो सोचना सीखिए, पूजा करना हो तो विश्वास करना सीखिए, बोलने से पहले श्रवण करना सीखिए। महाराज ने कृष्ण रुक्मणी विवाह प्रसंग पर समाज को संदेश देते हुए बताऐ आज समाज में विवाह एक खिलौना हो गया है जो समाज एवं उनके व्यवहारिक जीवन के लिए घातक है। युवा एवं युवती वर्गों को इंगित करते हुए वैवाहिक जीवन को गृहस्त धर्म का एक अंग बताते हुए कहे कदापि इसे खिलौना ना समझें। कथा स्थल के व्यास पीठ पर आज पोटका विधानसभा विधायक संजीव सरदार ने माथा टेककर भागवत का आशीर्वाद लिए एवं महाराज द्वारा कही गई बातों को सांसारिक जीवन में अमल करने की बात कही।कथा को सफल बनाने में आयोजक मंडली के अध्यक्ष रामेश्वर पात्र, मोहनलाल सरदार , महानंद रजक ,जयहरी सिंह मुंडा, दिनेश कुमार गुप्ता, आशुतोष मंडल, रंजीत महाकुड़, भीमसेन खंडवाल ,नरोत्तम दास,नयन बाछाड़,गुरूचरण दास, विकास सिंह, कृष्णा बनर्जी, श्रिकान्त मंडल, लक्ष्मीनाथ, भद्रा मंडल,सुमन मंडल , गौतम मंडल, गौरीशंकर पात्रों, उज्वल कुमार मंडल आदि का विशेष योगदान रहा। कथा के अंत में प्रसाद का वितरण सुब्रत कुमार मंडल उनके धर्मपत्नी नमिता मंडल पुत्र प्रीतीश मंडल व गिरीश मंडल के द्वारा किया गया।

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