श्री लक्ष्मीनारायण पंचदिवसीय महायज्ञ में कलश यात्रा द्वारा प्रकृति संरक्षण का सार्थक संदेश
पोटका से सुरेश कुमार महापात्र की रिपोर्ट
हाता स्थित गुरुकुल रामगढ़ आश्रम में पंचदिवसीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के आज प्रथम दिन कलश यात्रा के साथ-साथ वृक्ष लेकर यात्रा में शामिल होकर लोगों ने प्रसन्नता पूर्वक एक नई परंपरा की शुरुआत की ओर पर्यावरण रक्षा का एक संदेश दिया। यह परंपरा विद्यानिकेतन +2 उच्च विद्यालय हल्दी पोखर के पीजीटी (संस्कृत) शिक्षक चिन्तामणि त्रिपाठी के द्वारा प्रारंभ कराया गया। बतादें शिक्षक चिंतामणि त्रिपाठी सामाजिक कार्य में रुचि रखते हैं और पर्यावरण रक्षा के प्रति हमेशा तत्पर रहते हैं।कलश यात्रा में जल के साथ ही साथ हम वृक्ष पुष्प आदि लेकर यात्रा में सम्मिलित होने के विषय में शिक्षक चिंतामणि त्रिपाठी ने बताया कि शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार हमारी भारतीय सनातन सभ्यता एवं संस्कृति में उल्लेख प्राप्त होता है – *वृक्षानां* *चेतनत्वम्* अर्थात् वृक्षों में भी अन्य प्राणियों की ही भांति चेतना होती है। इसीलिए हमें वृक्षादि विभिन्न अवसरों पर लगाना चाहिए। साथ ही साथ पूर्व में लगाये गये वृक्षों का संरक्षण भी करना चाहिए। यज्ञीय कलशयात्रा के साथ ही साथ विवाह, वैवाहिक वर्षगांठ, मृतक श्राद्ध, जन्मोत्सव, विभिन्न पर्व एवं त्योहारों पर आतिशबाजी (पटाखा फोड़ने) करने के स्थान पर वृक्ष लगा करके हमें इस पुनीत कार्य के द्वारा प्रकृति अर्थात् सबके जीवन के अनुकूल बनाने में सकारात्मक भूमिका निर्वहन करना चाहिए। वृक्षारोपण से हमारा पर्यावरण संतुलन भी बना रहेगा। इस महायज्ञ में सम्मिलित अन्य यज्ञीय विद्वान् ब्राह्मणों ने भी कहा कि यह एक स्वस्थ एवं सर्वोपयोगी परंपरा है। यह स्वस्थ परंपरा सकारात्मक रूप से सदैव चलती रहे। जिससे हमें पुण्य के साथ ही साथ प्रकृति का सानिध्य तथा आशीर्वाद भी सदैव मिलता रहेगा।युवा पीढ़ी को पर्यावरण रक्षा के प्रति मार्गदर्शन करने की जरूरत है ताकि आने वाला पीढ़ी सुरक्षित जीवन यापन कर पाए ।

