हाथी घोड़ा पाल की जय कन्हैया लाल की नारे से गूंजा भागवत कथा स्थल
पोटका से सुरेश कुमार महापात्र की रिपोर्ट
ज्ञान और चरित्र का योग ही लौकिक एवं परमार्थिक उन्नति का सच्चा पथ है -पं उमाशंकर शुक्ला जी महाराज
पोटका प्रखंड अंतर्गत श्रीमद् भागवतकथा समिति हल्दीपोखर ग्राम वासियों की ओर से उड़िसा रोड़ पर आयोजित सप्तम दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस शुक्रवार को कथा स्थल में सभी श्री कृष्ण के प्यारे निले वस्त व राधा के प्यारे पित वस्त्र परिधान किये थे।कथावाचक पंडित उमाशंकर शुक्ला जी महाराज ने व्यास पीठ पर कथा की शुरुआत भागवत कि मंगलारती के साथ मंगलाचरण करते हुए वामन भगवान की कथा, नरसिंह भगवान की कथा, भगवान राम का जन्म कथा, बलराम एवं भगवान श्री कृष्ण के जन्म कथा पर भक्त मंडली से रूबरू हुए।कृष्ण जन्म कथा सुनते हुए महाराज ने बताएं मथुरा के राजा कंस ने अपनी बहन देवकी को रथ में बिठाया रथ चलने लगा तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र कंस को मारेगा। कंस ने देवकी को मारने के लिए तलवार उठाई लेकिन वासुदेव ने उसे समझाया कि वह देवकी को नहीं मारेगा बल्कि उसके पुत्र को मारेगा। कंस ने वासुदेव और देवकी को कारागार में डाल दिया और उसके 6 पुत्रों को मार दिया जब देवकी सातवीं बार गर्भवती हुई तो भगवान विष्णु ने देवकी के गर्भ में प्रवेश किया और सातवें पुत्र के रूप में बलराम का जन्म लिया। आठवीं बार देवकी गर्भवती हुई तो भगवान कृष्ण ने जन्म लिया। वासुदेव ने कृष्ण को गोकुल के नन्द और यशोदा के पास पहुंचा दिया और उनकी पुत्री को देवकी के पास छोड़ दिया। कंस ने उस पुत्री को मारने की कोशिश की लेकिन वह आकाश में उड़ गई और कंस को चेतावनी दी की कृष्ण जीवित है और वह उसे मारेगा। भगवान कृष्ण के जन्म के साथ पूरा माहौल भक्ति मय हो गया। भगवान श्री कृष्ण का जन्म समाज को सत्य की स्थापना, प्रेम और आनंद का प्रसार ,सामाजिक न्याय ,निष्काम कर्म एवं कुरीतियों के विरोध का संदेश देता है।वामन भगवान की कथा अहंकार और अत्यधिक लालच को त्याग करना सिखाती है। महाराज ने नरसिंह भगवान की कथा में धर्म पर धर्म की विजय, ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास, बुराई का अंत और संतुलन का संदेश दी।

