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माताजी आश्रम हाता में गुरु पूर्णिमा सह व्यास जयंती धूमधाम से मनाई गई

Suresh Mahapatra
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माताजी आश्रम हाता में गुरु पूर्णिमा सह व्यास जयंती धूमधाम से मनाई गई

पोटका से सुरेश कुमार महापात्र की रिपोर्ट

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माताजी आश्रम हाता में गुरु पूर्णिमा सह व्यास जयंती धूमधाम से मनाई गईमाताजी आश्रम हाता में भक्ति और श्रद्धा के साथ धूमधाम से गुरु पूर्णिमा सह व्यास जयंती मनाई गई।महा मुनि कृष्ण द्वौपायन वेद व्यास का जन्म श्रावनी पूर्णिमा के दिन हुआ था। वेद व्यास वेद, पुराण, भगवान गीता, उपनिषद आदि सनातन धर्म शास्त्र की रचयिता है जो हमें ज्ञान और भक्ति का मार्ग दिखाता है इसलिए व्यास देव को आदि गुरु मना जाता है और गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, इसलिए सनातन जीवन में गुरु पूर्णिमा का इतना महत्व है। इस अवसर पर नारायण और गुरु पूजा की गई एवं गुरु बन्दना, गुरु महिमा पर चर्चा, सामूहिक गुरु मन्त्र जप, भजन कीर्तन, कथा मृत पाठ तथा हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया गया। सुनील कुमार दे ने कहा हमारे जीवन में गुरु का स्थान सर्वोपरी है।जीवन के हर क्षेत्र में, हर उम्र के लोगों को गुरु की आवश्यकता पड़ती पढ़ती है मार्गदर्शन के लिए, बिना गुरु के सही ज्ञान नहीं मिलता। इसलिए समाज में गुरु का सम्मान होना चाहिए चाहे शिक्षा के क्षेत्र में हो, धर्म के क्षेत्र में, साहित्य, संस्कृति,संगीत,कला और विज्ञान के क्षेत्र में हो वहीं शंकर चंद्र गोप ने कहा पिता माता जीवंत गुरु है ,पिता माता रूपी गुरु का आशीर्वाद बिना जीवन में कभी उन्नति नहीं कर सकते।आज का दिन गुरु को पूजन, स्मरण और सम्मान करने का दिन है।सुनील कुमार दे, तरित मण्डल, श्रेया पाल, पतित पावन दास आदि ने गुरु बंदना किया।कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया।इस अवसर पर हिरा लाल दे, कृष्ण पद मण्डल, राजकुमार साहू, अरविंद दे, सूरज शंकर कर, मोहितोष गोप, सुधीर सरदार, मधुसूदन भट्टाचार्य, सुब्रत दे, लोचोना मण्डल, अंजलि मण्डल, सुजाता मरल, सिम्मी पालित, बेबी मण्डल, काज़ल मण्डल, बेला रानी मण्डल के अलावे माताजी आश्रम के ट्रस्टी, सदस्य, भक्त और महिलाएं काफ़ी संख्या में उपस्थित थे।

 

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माताजी आश्रम हाता में भक्ति और श्रद्धा के साथ धूमधाम से गुरु पूर्णिमा सह व्यास जयंती मनाई गई।महा मुनि कृष्ण द्वौपायन वेद व्यास का जन्म श्रावनी पूर्णिमा के दिन हुआ था। वेद व्यास वेद, पुराण, भगवान गीता, उपनिषद आदि सनातन धर्म शास्त्र की रचयिता है जो हमें ज्ञान और भक्ति का मार्ग दिखाता है इसलिए व्यास देव को आदि गुरु मना जाता है और गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, इसलिए सनातन जीवन में गुरु पूर्णिमा का इतना महत्व है। इस अवसर पर नारायण और गुरु पूजा की गई एवं गुरु बन्दना, गुरु महिमा पर चर्चा, सामूहिक गुरु मन्त्र जप, भजन कीर्तन, कथा मृत पाठ तथा हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया गया। सुनील कुमार दे ने कहा हमारे जीवन में गुरु का स्थान सर्वोपरी है।जीवन के हर क्षेत्र में, हर उम्र के लोगों को गुरु की आवश्यकता पड़ती पढ़ती है मार्गदर्शन के लिए, बिना गुरु के सही ज्ञान नहीं मिलता। इसलिए समाज में गुरु का सम्मान होना चाहिए चाहे शिक्षा के क्षेत्र में हो, धर्म के क्षेत्र में, साहित्य, संस्कृति,संगीत,कला और विज्ञान के क्षेत्र में हो वहीं शंकर चंद्र गोप ने कहा पिता माता जीवंत गुरु है ,पिता माता रूपी गुरु का आशीर्वाद बिना जीवन में कभी उन्नति नहीं कर सकते।आज का दिन गुरु को पूजन, स्मरण और सम्मान करने का दिन है।सुनील कुमार दे, तरित मण्डल, श्रेया पाल, पतित पावन दास आदि ने गुरु बंदना किया।कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया।इस अवसर पर हिरा लाल दे, कृष्ण पद मण्डल, राजकुमार साहू, अरविंद दे, सूरज शंकर कर, मोहितोष गोप, सुधीर सरदार, मधुसूदन भट्टाचार्य, सुब्रत दे, लोचोना मण्डल, अंजलि मण्डल, सुजाता मरल, सिम्मी पालित, बेबी मण्डल, काज़ल मण्डल, बेला रानी मण्डल के अलावे माताजी आश्रम के ट्रस्टी, सदस्य, भक्त और महिलाएं काफ़ी संख्या में उपस्थित थे।

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