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टांगराईन स्कूल के बच्चों ने पीएम मॉल में देखी फिल्म “स्पाइडर-मैन”
पोटका से सुरेश कुमार महापात्र की रिपोर्ट
Contents
टांगराईन स्कूल के बच्चों ने पीएम मॉल में देखी फिल्म “स्पाइडर-मैन”पोटका प्रखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, टांगराईन के बच्चों के लिए यह दिन किसी सपने के सच होने जैसा रहा। विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार तिवारी की पहल से स्कूल के 24 बच्चों ने पहली बार जमशेदपुर शहर के पीएम मॉल का भ्रमण किया और बड़े पर्दे पर सुपरहीरो फिल्म “स्पाइडर-मैन” का आनंद लिया। मॉल की चमक-दमक और सिनेमाघर का माहौल देखकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
कैसे हुआ बच्चों का चयन?
प्रधानाध्यापक श्री तिवारी ने बताया कि इस भ्रमण के लिए बच्चों का चयन किसी परीक्षा या रैंकिंग के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की छोटी-छोटी अच्छी आदतों और उपलब्धियों को पुरस्कृत करने के उद्देश्य से किया गया। किसी बच्चे ने धाराप्रवाह पहाड़ा सुनाकर यह मौका पाया, तो किसी ने अंग्रेजी शब्दों के अर्थ (वर्ड मीनिंग) बताकर। कोई नियमित रूप से जूता पहनकर विद्यालय आने के कारण चयनित हुआ, तो किसी ने किचन गार्डन की बेहतर देखभाल कर अपनी जगह बनाई।इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को बाहरी दुनिया से परिचित कराना।
प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार तिवारी ने कहा कि इस पहल के पीछे असली मकसद विद्यार्थियों को उनकी छोटी अच्छी आदतों के लिए सराहना देना और उन्हें गांव की सीमाओं से बाहर की दुनिया से रूबरू कराना था। उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश के बच्चे जब शहर की आधुनिक सुविधाओं और वातावरण को करीब से देखते हैं, तो उनके आत्मविश्वास और सोच के दायरे में सकारात्मक बदलाव आता है।
बच्चों में उत्साह चरम पर
पहली बार मॉल और सिनेमाघर देखने वाले बच्चों में उत्साह देखते ही बनता था। एस्केलेटर पर चढ़ना, चमकती दुकानों को निहारना और बड़े पर्दे पर सुपरहीरो के करतब देखना — यह सब उनके लिए एक यादगार अनुभव बन गया। भ्रमण के दौरान बच्चे लगातार हंसते-मुस्कुराते और आपस में बातें करते नजर आए।बच्चों ने इस पहल के लिए उनके खिलखिलाती चेहरे ने अपने चहेते प्रधान अध्यापक को दिल से दिया धन्यवाद।
पोटका प्रखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, टांगराईन के बच्चों के लिए यह दिन किसी सपने के सच होने जैसा रहा। विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार तिवारी की पहल से स्कूल के 24 बच्चों ने पहली बार जमशेदपुर शहर के पीएम मॉल का भ्रमण किया और बड़े पर्दे पर सुपरहीरो फिल्म “स्पाइडर-मैन” का आनंद लिया। मॉल की चमक-दमक और सिनेमाघर का माहौल देखकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
कैसे हुआ बच्चों का चयन?
प्रधानाध्यापक श्री तिवारी ने बताया कि इस भ्रमण के लिए बच्चों का चयन किसी परीक्षा या रैंकिंग के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की छोटी-छोटी अच्छी आदतों और उपलब्धियों को पुरस्कृत करने के उद्देश्य से किया गया। किसी बच्चे ने धाराप्रवाह पहाड़ा सुनाकर यह मौका पाया, तो किसी ने अंग्रेजी शब्दों के अर्थ (वर्ड मीनिंग) बताकर। कोई नियमित रूप से जूता पहनकर विद्यालय आने के कारण चयनित हुआ, तो किसी ने किचन गार्डन की बेहतर देखभाल कर अपनी जगह बनाई।इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को बाहरी दुनिया से परिचित कराना।
प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार तिवारी ने कहा कि इस पहल के पीछे असली मकसद विद्यार्थियों को उनकी छोटी अच्छी आदतों के लिए सराहना देना और उन्हें गांव की सीमाओं से बाहर की दुनिया से रूबरू कराना था। उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश के बच्चे जब शहर की आधुनिक सुविधाओं और वातावरण को करीब से देखते हैं, तो उनके आत्मविश्वास और सोच के दायरे में सकारात्मक बदलाव आता है।
बच्चों में उत्साह चरम पर
पहली बार मॉल और सिनेमाघर देखने वाले बच्चों में उत्साह देखते ही बनता था। एस्केलेटर पर चढ़ना, चमकती दुकानों को निहारना और बड़े पर्दे पर सुपरहीरो के करतब देखना — यह सब उनके लिए एक यादगार अनुभव बन गया। भ्रमण के दौरान बच्चे लगातार हंसते-मुस्कुराते और आपस में बातें करते नजर आए।बच्चों ने इस पहल के लिए उनके खिलखिलाती चेहरे ने अपने चहेते प्रधान अध्यापक को दिल से दिया धन्यवाद।
कैसे हुआ बच्चों का चयन?
प्रधानाध्यापक श्री तिवारी ने बताया कि इस भ्रमण के लिए बच्चों का चयन किसी परीक्षा या रैंकिंग के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की छोटी-छोटी अच्छी आदतों और उपलब्धियों को पुरस्कृत करने के उद्देश्य से किया गया। किसी बच्चे ने धाराप्रवाह पहाड़ा सुनाकर यह मौका पाया, तो किसी ने अंग्रेजी शब्दों के अर्थ (वर्ड मीनिंग) बताकर। कोई नियमित रूप से जूता पहनकर विद्यालय आने के कारण चयनित हुआ, तो किसी ने किचन गार्डन की बेहतर देखभाल कर अपनी जगह बनाई।इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को बाहरी दुनिया से परिचित कराना।
प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार तिवारी ने कहा कि इस पहल के पीछे असली मकसद विद्यार्थियों को उनकी छोटी अच्छी आदतों के लिए सराहना देना और उन्हें गांव की सीमाओं से बाहर की दुनिया से रूबरू कराना था। उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश के बच्चे जब शहर की आधुनिक सुविधाओं और वातावरण को करीब से देखते हैं, तो उनके आत्मविश्वास और सोच के दायरे में सकारात्मक बदलाव आता है।
बच्चों में उत्साह चरम पर
पहली बार मॉल और सिनेमाघर देखने वाले बच्चों में उत्साह देखते ही बनता था। एस्केलेटर पर चढ़ना, चमकती दुकानों को निहारना और बड़े पर्दे पर सुपरहीरो के करतब देखना — यह सब उनके लिए एक यादगार अनुभव बन गया। भ्रमण के दौरान बच्चे लगातार हंसते-मुस्कुराते और आपस में बातें करते नजर आए।बच्चों ने इस पहल के लिए उनके खिलखिलाती चेहरे ने अपने चहेते प्रधान अध्यापक को दिल से दिया धन्यवाद।

