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हल्दीपोखर में मुखिया देवी कुमारी के नेतृत्व में मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस
पोटका से सुरेश कुमार महापात्र की रिपोर्ट
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हल्दीपोखर में मुखिया देवी कुमारी के नेतृत्व में मनाया गया विश्व आदिवासी दिवसविश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य पर मुखिया देवी कुमारी भूमिज के नेतृत्व में हल्दीपोखर बाजार स्थित भगवान बिरसा मुंडा के प्रतिमा पर माला अर्पण कर उनको श्रद्धांजलि दी गई एवं जल-जंगल-जमीन की रक्षा का संकल्प लिया गया।विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर हल्दीपोखर बाजार में आदिवासी समाज की ओर से श्रद्धांजलि एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही आदिवासी समाज के सभी वीर शहीदों को नमन करते हुए उनके संघर्ष और बलिदान को याद किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुखिया देवी कुमारी भूमिज ने आदिवासी समाज के सभी भाई-बहनों को विश्व आदिवासी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का सच्चा पूजक है और जल, जंगल एवं जमीन के संरक्षण के लिए सदैव तत्पर रहा है। उन्होंने समाज के लोगों से अपनी संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने 9 अगस्त 1994 को विश्व आदिवासी दिवस की शुरुआत की थी। इस दिवस का उद्देश्य आदिवासी समुदायों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनकी संस्कृति, परंपराओं और विरासत का सम्मान करना है। यह दिवस हमें समानता, सम्मान और समावेश का संदेश देता है।
देवी कुमारी भूमिज ने कहा कि अब समय आ गया है कि हमारे पूर्वजों ने जिस जल, जंगल और जमीन की विरासत को हमें सौंपा है, उसकी रक्षा के लिए हम सभी संकल्प लें। उन्होंने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण की सेवा करते हुए आदिवासी समाज को विकास की ओर ले जाना और समाज में एक आदर्श स्थापित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।कार्यक्रम में आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा “धरती से नाता गहरा है, जंगल जिनकी जान है अद्भुत; आदिवासी जीवन सदा महान है” । इस अवसर पर कार्यक्रम में ग्राम प्रधान मोहम्मद असलम अंसारी, पंचायत सचिव जगतपति मंडल , उपमुखिया ओम प्रकाश गुप्ता आदि के साथ महिलायें एवं बच्चे शामिल हुए।
विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य पर मुखिया देवी कुमारी भूमिज के नेतृत्व में हल्दीपोखर बाजार स्थित भगवान बिरसा मुंडा के प्रतिमा पर माला अर्पण कर उनको श्रद्धांजलि दी गई एवं जल-जंगल-जमीन की रक्षा का संकल्प लिया गया।विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर हल्दीपोखर बाजार में आदिवासी समाज की ओर से श्रद्धांजलि एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही आदिवासी समाज के सभी वीर शहीदों को नमन करते हुए उनके संघर्ष और बलिदान को याद किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुखिया देवी कुमारी भूमिज ने आदिवासी समाज के सभी भाई-बहनों को विश्व आदिवासी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का सच्चा पूजक है और जल, जंगल एवं जमीन के संरक्षण के लिए सदैव तत्पर रहा है। उन्होंने समाज के लोगों से अपनी संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने 9 अगस्त 1994 को विश्व आदिवासी दिवस की शुरुआत की थी। इस दिवस का उद्देश्य आदिवासी समुदायों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनकी संस्कृति, परंपराओं और विरासत का सम्मान करना है। यह दिवस हमें समानता, सम्मान और समावेश का संदेश देता है।
देवी कुमारी भूमिज ने कहा कि अब समय आ गया है कि हमारे पूर्वजों ने जिस जल, जंगल और जमीन की विरासत को हमें सौंपा है, उसकी रक्षा के लिए हम सभी संकल्प लें। उन्होंने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण की सेवा करते हुए आदिवासी समाज को विकास की ओर ले जाना और समाज में एक आदर्श स्थापित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।कार्यक्रम में आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा “धरती से नाता गहरा है, जंगल जिनकी जान है अद्भुत; आदिवासी जीवन सदा महान है” । इस अवसर पर कार्यक्रम में ग्राम प्रधान मोहम्मद असलम अंसारी, पंचायत सचिव जगतपति मंडल , उपमुखिया ओम प्रकाश गुप्ता आदि के साथ महिलायें एवं बच्चे शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुखिया देवी कुमारी भूमिज ने आदिवासी समाज के सभी भाई-बहनों को विश्व आदिवासी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का सच्चा पूजक है और जल, जंगल एवं जमीन के संरक्षण के लिए सदैव तत्पर रहा है। उन्होंने समाज के लोगों से अपनी संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने 9 अगस्त 1994 को विश्व आदिवासी दिवस की शुरुआत की थी। इस दिवस का उद्देश्य आदिवासी समुदायों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनकी संस्कृति, परंपराओं और विरासत का सम्मान करना है। यह दिवस हमें समानता, सम्मान और समावेश का संदेश देता है।
देवी कुमारी भूमिज ने कहा कि अब समय आ गया है कि हमारे पूर्वजों ने जिस जल, जंगल और जमीन की विरासत को हमें सौंपा है, उसकी रक्षा के लिए हम सभी संकल्प लें। उन्होंने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण की सेवा करते हुए आदिवासी समाज को विकास की ओर ले जाना और समाज में एक आदर्श स्थापित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।कार्यक्रम में आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा “धरती से नाता गहरा है, जंगल जिनकी जान है अद्भुत; आदिवासी जीवन सदा महान है” । इस अवसर पर कार्यक्रम में ग्राम प्रधान मोहम्मद असलम अंसारी, पंचायत सचिव जगतपति मंडल , उपमुखिया ओम प्रकाश गुप्ता आदि के साथ महिलायें एवं बच्चे शामिल हुए।

