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प्रसिद्ध बांग्ला साहित्यकार सह समाजसेवी हराधान अधिकारी का आकस्मिक निधन,झारखण्ड साहित्य संस्कृति परिषद ने किया गहरा शोक व्यक्त

Suresh Mahapatra
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प्रसिद्ध बांग्ला साहित्यकार सह समाजसेवी हराधान अधिकारी का आकस्मिक निधन,झारखण्ड साहित्य संस्कृति परिषद ने किया गहरा शोक व्यक्त

 

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प्रसिद्ध बांग्ला साहित्यकार सह समाजसेवी हराधान अधिकारी का आकस्मिक निधन,झारखण्ड साहित्य संस्कृति परिषद ने किया गहरा शोक व्यक्तजमशेदपुर के वरिष्ठ बांग्ला साहित्यकार और समाजसेवी हराधान अधिकारी का 20 जून 2026 की रात को आकस्मित निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वह 75 वर्ष के थे। स्वर्गीय अधिकारी बांग्ला के एक प्रसिद्ध लेखक और समाजसेवी थे। वह मुख्य रूप से उपन्यास लिखने में रुचि रखते थे।उनकी कुछ महत्वपूर्ण उपन्यास काफ़ी चर्चित है।हराधान अधिकारी न केवल अपनी पुस्तकों का प्रचार-प्रसार करते थे, बल्कि अन्य कवियों और लेखकों की पुस्तकों को साइकिल से कई घरों तक पहुंचाते थे, जो एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने स्वयं विवाह नहीं किया था, लेकिन सैकड़ों गरीब लड़कियों की शादी में चंदा करके और पिता के रूप में कन्या दान करवाया, जो आज के समय में एक प्रेरणा है। वह झारखण्ड साहित्य संस्कृति परिषद के सलाहकार सदस्य थे और झारखण्ड प्रभा के नियमित लेखक भी थे। उनकी आकस्मिक निधन से झारखण्ड साहित्य संस्कृति परिषद की ओर से सुनील कुमार दे, शंकर चंद्र गोप, भवतारण मण्डल, स्वपन कुमार मण्डल, राजकुमार साहू, कृष्ण पद मण्डल, उज्जवल कुमार मण्डल, आशुतोष मण्डल, रघु नंदन बनर्जी, दुलाल मुखर्जी, दुलाल दास, निशित दास, जय हरि सिंह मुंडा, करुणामय मण्डल, मृणाल पाल आदि ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उनकी आत्मा की शांति के लिए परिषद ने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए उनके शोक संतप्त परिवार जनों के प्रति संवेदना प्रकट की है।

पोटका से सुरेश कुमार महापात्र की रिपोर्ट

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जमशेदपुर के वरिष्ठ बांग्ला साहित्यकार और समाजसेवी हराधान अधिकारी का 20 जून 2026 की रात को आकस्मित निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वह 75 वर्ष के थे। स्वर्गीय अधिकारी बांग्ला के एक प्रसिद्ध लेखक और समाजसेवी थे। वह मुख्य रूप से उपन्यास लिखने में रुचि रखते थे।उनकी कुछ महत्वपूर्ण उपन्यास काफ़ी चर्चित है।हराधान अधिकारी न केवल अपनी पुस्तकों का प्रचार-प्रसार करते थे, बल्कि अन्य कवियों और लेखकों की पुस्तकों को साइकिल से कई घरों तक पहुंचाते थे, जो एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने स्वयं विवाह नहीं किया था, लेकिन सैकड़ों गरीब लड़कियों की शादी में चंदा करके और पिता के रूप में कन्या दान करवाया, जो आज के समय में एक प्रेरणा है। वह झारखण्ड साहित्य संस्कृति परिषद के सलाहकार सदस्य थे और झारखण्ड प्रभा के नियमित लेखक भी थे। उनकी आकस्मिक निधन से झारखण्ड साहित्य संस्कृति परिषद की ओर से सुनील कुमार दे, शंकर चंद्र गोप, भवतारण मण्डल, स्वपन कुमार मण्डल, राजकुमार साहू, कृष्ण पद मण्डल, उज्जवल कुमार मण्डल, आशुतोष मण्डल, रघु नंदन बनर्जी, दुलाल मुखर्जी, दुलाल दास, निशित दास, जय हरि सिंह मुंडा, करुणामय मण्डल, मृणाल पाल आदि ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उनकी आत्मा की शांति के लिए परिषद ने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए उनके शोक संतप्त परिवार जनों के प्रति संवेदना प्रकट की है।

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